|
أَرَأَيـتَ
كَيـفَ
نَوى
الرَحيلا
|
أَرأَيـتَ
كَيـفَ
سـَرى
عجـولا
|
|
أَرأَيــتَ
كَيـفَ
الركـب
مـا
|
لَ
مُخالِفـاً
منّـا
الميـولا
|
|
حـــثّ
المَطايــا
شــائياً
|
تِلـكَ
الَّـتي
شـأت
النصولا
|
|
وَحـــدا
لهـــنّ
فَأَصــبحت
|
سـبل
الحـزون
لَهـا
سهولا
|
|
مــالَت
إِلــى
كـلّ
الجِهـا
|
ت
كأنَّهــا
شــربت
شـُمولا
|
|
أَيــدي
المَطايــا
خفّفــي
|
يصـل
الوَخيـد
بك
الذَميلا
|
|
وَترفّقـــي
بـــثرى
حمــى
|
أَمسـى
الرفـاق
بـه
حلولا
|
|
حملــوا
الجلال
وَأَدلجــوا
|
يـا
راحلين
ضعوا
الحمولا
|
|
يـــا
راحليــن
تريّثــوا
|
وَقِفـوا
عَلى
الوادي
قَليلا
|
|
تلــكَ
الذبالــة
غــودِرَت
|
فـي
الغَيهبِ
الداجي
ذبولا
|
|
تلــكَ
الربــوعُ
المشـرقا
|
ت
مـن
السـَنى
أَمسَت
طلولا
|
|
مــن
كــانَ
ينـزل
قفرهـا
|
ويـــردّ
موحشـــها
أَهيلا
|
|
أَمســى
ترابــاً
وَالــترا
|
ب
عَلـــى
محيـــاه
أَهيلا
|
|
أَرأَيــتَ
تلـك
النَفـس
كَـي
|
فَ
أَبَت
عَلى
الخسف
النزولا
|
|
مَخضـــوبَة
بــدم
المُنــى
|
نصـلت
مـن
الـدنيا
نصولا
|
|
مـن
بعـد
مـا
هـدت
النُفو
|
سَ
وَنبّهـت
منهـا
الخمـولا
|
|
الشـــرق
جـــلّ
مصـــابهُ
|
بزعيمــه
فَبَكــى
طَــويلا
|
|
الشـــرق
لَيـــسَ
بمرتَــض
|
بالشـرق
مـن
سـعد
بَـديلا
|
|
الشـــرقُ
حـــارَ
دليلــهُ
|
يـا
مَـن
لـه
كنت
الدَليلا
|
|
الشـــرق
ضـــاقَ
مجــالهُ
|
لســواك
فيــه
أَن
يَجـولا
|
|
أَيـــنَ
البَيــان
وَســحره
|
وَالعــزم
لا
يَغــدو
كَليلا
|
|
أَيـــنَ
الغنـــيّ
برأيــه
|
وَالســيف
لا
يغنـي
فَـتيلا
|
|
مَـن
ذا
طَـوى
العلم
الرَفي
|
عَ
وَقلّــص
الظــلّ
الظَليلا
|
|
مَـن
ذا
اِسـتَطال
إِلى
الَّذي
|
شـاد
البنـاء
المُسـتَطيلا
|
|
طَعـــن
اللَيــالي
طعنــةً
|
مَنَعتــه
فيهـا
أَن
يَصـولا
|
|
وَرأتـــه
كـــرّ
فَســـلّمت
|
فَغَدا
القؤول
بها
الفعولا
|
|
لَـو
شـاءَ
قتـل
الـدهر
ثم
|
مَ
رَمــى
لألفــاه
قَــتيلا
|
|
لرمــى
الحمــامُ
بمثلــهِ
|
لَـو
أَدرك
الطـرف
الختولا
|
|
يــا
أَيُّهـا
الفحـل
الَّـذي
|
بــذّ
الجهابـذةَ
الفحـولا
|
|
هضــبُ
البَســيطة
أَوشــكت
|
مـن
هـول
يومـك
أَن
تزولا
|
|
بكـــر
النعــيّ
فَطأطــأت
|
شــمّ
الأُنــوف
لـه
ذهـولا
|
|
دَهـــت
الزَمــان
بِفــادِحٍ
|
جَفـلَ
الزَمـان
لـه
جفـولا
|
|
دهيــاء
تَجتــاح
الفــرو
|
ع
مَــتى
أَنـاخَت
وَالأصـولا
|
|
قصــــّامة
فـــي
مرّهـــا
|
قَصـمَت
لنا
الظهرَ
الحمولا
|
|
جاشــَت
علينــا
بــالرَعي
|
ل
من
الخطوب
يلي
الرعيلا
|
|
راع
الشـــَبابَ
نزولهـــا
|
وَالشــيب
منّـا
وَالكهـولا
|
|
بَينـــا
لِســـعدٍ
يهتفــو
|
نَ
إِذا
الهتـاف
غَدا
عَويلا
|
|
حَمَلــوكَ
وَالعـالي
الـذرى
|
وَطــووك
وَالمَجــد
الأَثيلا
|
|
حملـوا
المصـاب
وَأَغمَـدوا
|
فـي
تربـك
العضب
الصَقيلا
|
|
مــا
كنــت
أَحسـب
أرؤسـاً
|
أَعلَيتهـــا
ترتـــدّ
ميلا
|
|
لَــولا
القَضــاء
لأقبَلــوا
|
يَتلـو
القَبيل
لك
القَبيلا
|
|
وَتجرّعــوا
عنــك
الــدَوا
|
ءَ
المـرّ
وَالـداء
الوَبيلا
|
|
واِســـتَقبَلوا
بصـــدورهم
|
وَنحــورهم
تلـك
النصـولا
|
|
غــررُ
المَعـالي
قَـد
أَبَـت
|
إِلّاك
يـــا
ســعد
ســَليلا
|
|
الثـــــاكِلات
وَحيــــدها
|
ملأت
بــك
الـدنيا
ثكـولا
|
|
يــا
بــدر
مصــر
طالِعـاً
|
مـن
ذا
أَتـاح
لـك
الأفولا
|
|
أَمَقيلنــــا
عثراتنــــا
|
هَلّا
تركـــت
لنـــا
مقيلا
|
|
هلّا
تَركــــتَ
لَنــــا
رَدي
|
فـاً
فـي
مكانـك
أَو
زميلا
|
|
عِبـــء
الرئاســةِ
بــاهِظٌ
|
مَـن
يحمـلُ
العبء
الثَقيلا
|
|
ليـــلُ
السياســةِ
حالــكٌ
|
مَـن
ذا
يضيء
لَنا
السَبيلا
|
|
مَـــن
ذا
وكلـــت
بأمّــة
|
يـا
مَـن
لَها
كنت
الوَكيلا
|
|
مَــن
ذا
يَقـوم
مَقـام
شـخ
|
صــكَ
جـائِلاً
فيهـا
صـؤولا
|
|
أَتـرى
أقيـلَ
اليـومَ
سـعدٌ
|
أَم
رأى
أَن
يَســــــتَقيلا
|
|
حاشــاه
مـا
كـانَ
السـؤو
|
م
مـنَ
الجِهاد
وَلا
المَلوما
|
|
مَــن
كــانَ
ملـء
الأَرضِ
أَص
|
بَـحَ
في
الثَرى
شبحاً
ضَئيلا
|
|
مـن
كـانَ
يَحمـي
غيـل
مـص
|
ر
قيـلَ
عنـهُ
اليـومَ
غيلا
|
|
لَيــتَ
الرَحيــل
وَلَيـت
لا
|
تجـدي
أَعـادَ
لَنا
الرَحيلا
|
|
قَــد
كـانَ
لـي
أَمَـل
فَـزا
|
ولــه
الضـَنى
حَتّـى
أزيلا
|
|
لَـم
يبـق
لـي
بـرح
الضَنى
|
إِلّا
التـــألّم
وَالنُحــولا
|
|
القَلـــــب
شــــبّ
أواره
|
هَـل
نهلـة
تَشـفي
الغَليلا
|
|
الـــــداء
عــــزّ
دواؤُهُ
|
هَـل
نظـرةٌ
تـبري
الغَليلا
|
|
أَحَمامَــة
الـوادي
اِهـدلي
|
إِنّــي
أُشــاطرك
الهَـديلا
|
|
أَيكـــي
وأيكـــك
واحِــد
|
يَبكـي
الخَليل
به
الخَليلا
|
|
قــولي
كَمــا
قـالَت
يـدي
|
بَينـي
وَبَيـنَ
السـَيف
حيلا
|
|
كــبرى
المَصــائِب
حـاولت
|
دون
الأَمــاني
أَن
تَحــولا
|
|
كــبرى
المَصــائِب
حــوّلت
|
شـَمس
الضـُحى
فينـا
أَصيلا
|
|
قَــد
كنــت
أَعـذل
جازِعـاً
|
وَأَرى
العَـذير
لـه
جَهـولا
|
|
وَاليَــوم
أَعـذر
مـن
بَكـا
|
كَ
وَواصـلَ
الـدمعَ
الهطولا
|
|
لَــو
جَمَّعـوا
شـمل
الـدُمو
|
عِ
لَـزاد
هَـذا
النيل
نيلا
|
|
جرحتــك
يـا
شـرق
الخُطـو
|
ب
فــرمّ
جرحـك
أَن
يَسـيلا
|
|
الجــــرحُ
إِن
أَهملتــــهُ
|
أَعجلــتَ
لِلجـرحِ
النغـولا
|
|
قُـــل
لِلمَصــائِب
فلتهــل
|
مـا
شـاءَ
خطـب
أَن
يَهـولا
|
|
نَفــذ
القَضــاء
فَلا
تَــرُم
|
مَنجـــى
لســعدٍ
أَو
مقيلا
|
|
حســر
الزَمــان
فشــمّروا
|
وَذَروا
وَراءَكمـو
الكَسـولا
|
|
يَــدعو
إِلـى
نيـل
المُنـى
|
مـن
كـانَ
مـن
قصـد
منيلا
|
|
فتكفَّلـــوا
بِنَجــاح
مــن
|
بِنجــاحكم
كــانَ
الكَفيلا
|
|
وَتَضــامَنوا
تصــل
المنـى
|
إِن
غـابَ
مـن
ضمن
الوصولا
|
|
أَتـرى
يعـود
لنـا
الهَنـا
|
أَم
ذاكَ
لا
يَنــوي
قفــولا
|
|
أَيَعـــود
فينــا
ممكنــاً
|
مـا
عـادَ
فينـا
مُسـتَحيلا
|
|
جــادَ
الزَمــان
بـه
زَمـا
|
نــاً
ثُـمَّ
عـادَ
بِـهِ
بَخيلا
|
|
أَتَــرى
تَــزول
حيـاة
مـن
|
أَحيـا
المَـدارِك
وَالعُقولا
|
|
مَــن
لــي
بِسـعد
إِن
جَـرى
|
مطـر
الخطـوب
بنـا
سيولا
|
|
هُــوَ
ذَلِــك
الرَجـل
الَّـذي
|
عـدم
الرِجـال
لـه
مَـثيلا
|
|
فَـــإِذا
تمثّـــل
شخصـــه
|
مثلـت
لَنـا
الحُسنى
مثولا
|
|
أَو
عَـــنّ
يَومـــاً
فضــله
|
فضـل
الـوَرى
أَمسـى
فَضولا
|
|
ذكــراه
قَــد
هـاجَت
جـوى
|
فــي
كــلّ
جانحــة
دَخيلا
|
|
هَيهــات
لا
ترخــي
العُصـو
|
ر
عَلــى
مــآثره
ســدولا
|
|
مــا
بــال
ســعد
لا
يُجـي
|
ب
وَلا
يــردّ
اليَـوم
سـولا
|
|
يــا
ســعد
عــذرك
بيّــن
|
يـا
سـعد
لا
تَخشى
العذولا
|
|
إِنّــــا
وَردنــــا
حنظلاً
|
ووردت
أَنــتَ
السَلســَبيلا
|
|
دنيـــا
بلـــوت
خلالهــا
|
وَســبرتها
عرضــاً
وَطـولا
|
|
تَركَتـــك
تُصــلح
شــأنها
|
وَتَرَكتهـــا
قـــالا
وَقيلا
|
|
وَســـَتذكر
الأَجيــالُ
صــن
|
عـك
فـي
الوَرى
جيلاً
فَجيلا
|
|
لَـك
أَفضـَل
الأَجرين
في
الد
|
داريـن
مِـن
أُخـرى
وَأولـى
|
|
اليَــوم
يومــك
فاِبتــدر
|
وأعـد
لَنا
الصنع
الجَميلا
|
|
عُــد
لِلمَواقــفِ
واِرتَجــل
|
دعــت
القضـيّة
أَن
تَقـولا
|
|
أَولَيتنــا
المنـن
الجِسـا
|
م
فهــاكه
شــكراً
جَـزيلا
|
|
وَاللَــه
أَولــى
أَن
يــزي
|
دَ
لـك
الجـزاءَ
غداة
تولى
|
|
اللَّيــث
أَصــحر
فــاِرقبي
|
يا
مصر
في
الغاب
الشبولا
|
|
طـــولي
بســعد
إن
أَبــت
|
أَيّــام
ســعد
أَن
تطــولا
|
|
أَبنـــاء
ســـعدٍ
حقّقــوا
|
بالجــدّ
مقصـده
النَـبيلا
|
|
ســـيروا
عَلــى
منــوالهِ
|
أَو
أَن
يقـال
القصـد
نيلا
|