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رفعـت
إليـك
الكـف
يـا
خيـر
رافـع
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وأحســنت
ظنــي
فيـك
بيـن
قـواطعي
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ومــا
معـك
اللهـم
ليـس
بمـا
معـي
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وحاشــاك
عــن
ردي
وقطــع
مطـامعي
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لشـــؤم
جــدودي
واتضــاح
جمــودي
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أحـاطت
بهـذا
لعبـد
سـود
المصـائب
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وجــدَّ
ولكــن
ســهمه
ســهم
خــائب
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ومـا
السـعي
إن
لـم
يتصل
بالمواهب
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وإن
كــان
ســعِيْ
لا
يفــي
بمطـالبي
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وإن
حظـــوظي
عــن
منــاي
قيــودي
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معوقـــة
قصـــدي
مضــيق
رحابهــا
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تناصــبني
رغــم
الأمــاني
حرابهـا
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إذا
فتحــت
بابــاً
فللشــر
بابهـا
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فــان
بقصـدي
اللّـه
تغـدو
صـعابها
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وإن
عظمــــت
قـــدراً
أذل
مقـــود
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ومــن
يعـتزز
بـاللّه
عـز
ومـن
لـه
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تــولى
ففــي
الحــالات
يرفـع
ذلـه
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ومــن
ذلَّ
فــي
تمجيــده
لـم
يـذله
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ومــن
يتمســك
بــالإله
تكــن
لــه
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إذا
رامهـــا
العنقــا
أذلَّ
مصــيد
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رأى
اللّــه
للاســلام
منــي
قائمــا
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وســل
عزومــي
لــو
تحققـن
صـارما
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فأصـبحت
بيـن
العـزم
والدرك
هائما
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ولمــا
رأيــت
الحــظ
عنـي
نائمـا
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وكــان
قيــامي
فيــه
مثـل
قعـودي
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وكــان
اجتهـادي
كالتقاعـد
جاثمـا
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وصـرت
لمـا
ابنـي
كمـا
كنـت
هادما
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ترينـي
الأمـاني
شـكل
ما
كنت
حالما
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وإن
فعــالي
مثــل
مــالي
كلاهمــا
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لــدارس
ديــن
اللّــه
غيــر
معيـد
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إذا
تـم
أمـر
كنـت
في
الماء
راقما
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وإن
أحكـم
التـدبير
حكمـاً
تصـارما
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كــاني
لحزمـي
مثـل
عزمـي
مزاحمـا
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وإن
لســـاني
مثــل
كفــي
كلاهمــا
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لاظهــار
ديــن
اللّــه
غيــر
مفيـد
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ومــن
عــثرات
الجــد
أنـي
طالمـا
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رمـى
الغـدر
تـدبيري
فأثبت
ما
رمى
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وإنــي
لا
آوى
مــن
الصــدق
عاصـما
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وإن
حســـامي
كـــاليراع
كلاهمـــا
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لأعــداء
ديــن
اللّــه
غيــر
مبيـد
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أرى
نصــر
ربــي
مـن
أداء
أمـانتي
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وهيهــات
عــزت
مكنــتي
ومكــانتي
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وحـالت
إلـى
خـرط
القتـاد
اعـانتي
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ودهــري
لــم
يـأذن
بغيـر
اهـانتي
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واكـــرام
خصـــم
للالـــه
عنيـــد
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أجاهـد
كيـد
الـدهر
بالعزم
والعنا
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وقـض
الحصـا
مـن
مطلـبي
كان
الينا
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كــأن
محــالاً
كـل
مـا
كـان
ممكنـا
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وغايـة
محصـولي
المواعيـد
والمنـى
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وإن
وعــــود
الغـــدر
أي
وعـــود
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أهــم
بنصــر
اللّـه
والجـد
ممسـكي
|
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ولـو
خضـت
فيـه
مهلكـاً
بعـد
مهلـك
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ومـن
لـي
وقـد
سـد
التخـاذل
مسلكي
|
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ولـم
يبـق
عنـدي
اليـوم
إلا
تمسـكي
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بعــــروة
ركـــن
للالـــه
شـــديد
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وتفــويض
أمــري
للمــدبر
خيرتــي
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واســقاط
تــدبيري
وتعطيـل
حيلـتي
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وتـرك
عـرى
الأسـباب
مـن
كـل
وجهـة
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جمعــت
همــومي
وانتجعــت
بهمــتي
|
إلــى
بــاب
وهــاب
الجـدود
مجيـد
|
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إلـى
بـاب
مـن
أغنـى
وأقنى
وأنعما
|
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إلــى
بــاب
قهــار
أهـان
وأكرمـا
|
|
إلـى
بـاب
مـن
أفنـى
وأحيا
وأعدما
|
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إلـى
باب
من
يدعوه
في
الأرض
والسما
|
ومــن
فينمــا
مــن
ســيد
ومســود
|
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إلــى
بــاب
مـن
جـدي
بـذلي
لجـده
|
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إلـى
بـاب
مـن
درك
الأمـاني
بقصـده
|
|
إلـى
بـاب
مـن
تعنـو
الوجوه
لمجده
|
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إلـى
بـاب
مـن
فـي
كـل
يـوم
بحمده
|
لــه
أي
شــأن
فــي
الأنــام
جديـد
|
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إلـى
بـاب
رب
العـالمين
ومكـرم
ال
|
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مطيعيــن
خيـر
الراحميـن
مقسـم
ال
|
|
مــواهب
شــكار
لصــالح
مــا
عمـل
|
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إلـى
بـاب
خيـر
الناصرين
وأكرم
ال
|
فيـــدين
خيـــر
الفـــاتحين
ودود
|
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إلـى
بـاب
جبـار
السـموات
غالب
ال
|
|
جبابر
ذي
البطش
الشديد
المراقب
ال
|
|
أمــور
ومــن
يقصـده
للأحتمـي
قبـل
|
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إلـى
بـاب
وهـاب
الممالـك
قالب
ال
|
كراســــي
قهـــار
لكـــل
عنيـــد
|
|
إلى
القاهر
المبدي
المعيد
اختياره
|
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إلـى
الحكـم
العـدل
الـذي
عز
جاره
|
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المتـــولي
مـــن
إليـــه
فــراره
|
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إلـى
مالـك
الملـك
العظيم
اقتداره
|
إلــى
مــن
لــه
الأملاك
خيـر
عبيـد
|
|
ضــرعت
إليـه
مخبـت
القلـب
عافيـاً
|
|
ذليلاً
ضـــعيفاً
عـــاجزاً
متفانيــاً
|
|
بــريئاً
إليــه
مـن
نفـوذ
محاليـاً
|
|
وقوفــاً
علـى
أبـوابه
منـه
راجيـاً
|
قيــام
حظـوظي
فـي
العلـى
وجـدودي
|
|
عســى
رحمــة
منــه
وعطــف
ونظـرة
|
|
وموهبـــة
تنهـــل
منـــه
ملثـــة
|
|
وعارفـــة
مـــن
جـــوده
ومـــودة
|
|
فتخــرق
لــي
فيـه
العـوائد
نفحـة
|
ســـماوية
مـــن
مبـــدئ
ومعيـــد
|
|
فتــبرأ
مــن
حـق
الجهـادين
ذلـتي
|
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وتعلـو
بهـا
فـي
نصـرة
الله
كلمتي
|
|
ويبسـط
لـي
إن
شـاء
إتمـام
نعمـتي
|
|
حظوظـاً
يقـوم
الـدهر
فيهـا
بخدمتي
|
ويســعى
بمــا
لا
يشــتهيه
حســودي
|
|
علــى
قـائم
بالقسـط
إرسـال
أيـده
|
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فيطلقنــي
مــن
غــل
عجـزي
وقيـده
|
|
حظوظـاً
كفـت
عـن
عَمـروِ
كـونِ
وزيده
|
|
تقـــوم
بتـــدبير
الإلــه
وكيــده
|
لأمـــر
عليــه
لــم
أكــن
بجليــد
|
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معاجلـــة
خصـــمي
بأخــذ
يمينــه
|
|
وبعـــث
بلايـــاه
وقطـــع
وتينــه
|
|
تقــر
لشــرع
اللــه
عيــن
أمينـه
|
|
وتســعى
بمــا
يرضـي
الإلـه
لـدينه
|
إذا
مــا
أمــات
الحــق
كـل
مريـد
|
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الهيــة
قــد
سـاقها
اللـه
منجـداً
|
|
مظفـــرة
لا
يســتقر
لهــا
العــدى
|
|
يفـل
بهـا
عـرش
الضـلال
مـن
اهتـدى
|
|
بهـا
قـام
مـن
قلـبي
الأئمة
بالهدى
|
وكــانت
لرســل
اللـه
قبـل
وجـودي
|
|
يخـــص
شـــؤوني
فتحهــا
ويعمهــا
|
|
يصـرف
لـي
فـي
الكـون
قهـراً
أتمها
|
|
وتجلــى
بهـا
الجلـى
ويفـرج
همهـا
|
|
يتــم
بهــا
النعمــا
علـى
متممـاً
|
قــديماً
علــى
خيــر
الخلائق
صــيد
|