|
ضــل
ســعي
ومـا
اهتـديت
سـبيلا
|
كيــف
أهــدى
ومـا
اتبعـت
دليلا
|
|
ســاء
فعلـي
واسـود
أبيـض
قلـبي
|
مـا
احتيـالي
وقـد
عصيت
الجليلا
|
|
وأطعـــت
الهــوى
وغيــر
جميــل
|
أن
أطيـع
الهـوى
وأعطـي
الجميلا
|
|
وحملــــت
الــــذنوب
حملا
ثقيلا
|
كيــف
أنجــو
وقــد
حملـت
ثقيلا
|
|
وركبــت
الهــوى
ســيرا
ومكثــا
|
كيــف
أمســي
وقــد
اسـأت
مقيلا
|
|
وطرحــت
الجــد
المنجــي
راســا
|
ولزمـــت
التســويف
والتســويلا
|
|
وعصــيت
النهـى
ومـن
فـوق
رأسـي
|
منــذر
الشـيب
سـل
سـيفا
صـقيلا
|
|
ونضــا
الشـيب
فـوق
رأسـي
سـيفا
|
لــم
أطعــه
وقــد
غـدا
مسـلولا
|
|
مـا
احتيـالي
إذا
احتضـرت
ونادى
|
مزعـج
السـاكن
الرحيـل
الـرحيلا
|
|
أم
بمــاذا
أدلـي
ومـا
لـي
عـذر
|
غيـــر
أنـــي
اســأت
فعلا
وقيلا
|
|
فــدعوني
أبكــي
وأنــدب
شــجوى
|
إن
شــــجوى
أثــــار
داء
دخيلا
|
|
وأســيل
الــدموع
شــيئا
فشـيئا
|
وأجــــوب
الربــــوع
ميلا
فميلا
|
|
وأســاري
الضـاعون
ركبـا
فركبـا
|
وأراعــــي
النجـــوم
جيلا
فجيلا
|
|
عــل
مـاء
الـدموع
يطفىـء
نـارا
|
أورثـــت
مهجـــتي
أســى
وعليلا
|
|
أو
عســى
لوعــتي
تجفــف
دمعــا
|
ضـــير
الجســم
بالســقام
نحيلا
|
|
مــن
معينــي
وليــس
غيـر
معيـن
|
صـــير
الخــد
للــدماء
مســيلا
|
|
مــن
وصــيفي
وليــس
غيـر
معيـن
|
صـــير
الخــد
للــدماء
مســيلا
|
|
مــن
وصــيفي
وليـس
طرفـي
مـاذا
|
عوّجــاني
ومــا
اســتقاما
قليلا
|
|
يــا
فــؤادي
أراك
تعـزو
لطرفـي
|
مــا
جنتـه
اليـدان
عـزوا
مهيلا
|
|
إن
تلمــه
تجــد
لإنســان
عينــي
|
فـي
بحـار
الـدموع
سـبحا
طـويلا
|
|
أو
يلمــك
الإنســان
يشــهد
جهلا
|
بيــن
جنبيــك
قـد
غـدا
مشـعولا
|
|
يــا
ثقــاتي
وأيـن
منـي
ثقـاتي
|
جـاوز
السـيل
حيـث
فـاض
التلولا
|
|
يــا
أمــاني
وأيـن
منـي
أمـاني
|
شــغل
الحلــي
أهلــه
أنـي
زولا
|
|
يــا
حيــاتي
وكيــف
لـي
بحيـاة
|
والهـــوى
صــير
العليلا
قــتيلا
|
|
يـا
نسـيما
مـن
أرض
طيبـة
وافـى
|
عطــر
الجــو
حيــث
صــار
بليلا
|
|
ملأ
الأرض
زرنبـــــا
وبهـــــارا
|
وخزامـــــا
وأذخـــــرا
وجليلا
|
|
قـد
فرشـنا
لـك
العيـون
اتضـاعا
|
ولثمنـــا
لـــك
الــثرى
تبجيلا
|
|
علـــل
الصــب
بــالقبول
فــإني
|
يــا
نســيم
الصـبا
أراك
قبـولا
|
|
وأعنـــي
علـــى
تعلـــل
صــبري
|
ربمــا
ســاعد
العليــل
العليلا
|
|
وأعــدلي
ذكــر
الحــبيب
لأســقي
|
بحــديث
الحــبيب
كاســا
شـمولا
|
|
وغــذا
عــدت
للمنــازل
فاشــرح
|
قصــة
الصــب
واحـذر
التطعـويلا
|
|
واقــر
منــي
لــه
السـلام
وقبـل
|
عنــي
النعــل
والــثرى
تقـبيلا
|
|
واجــر
بــالله
يـا
نسـيم
بلطـف
|
بعــض
ذكـري
عنـد
الحـبيب
قليلا
|
|
واحـــك
ذلـــي
لعـــزه
وتعطــف
|
فعســى
يرحــم
العزيـز
الـذليلا
|
|
وتلطـــف
عســـى
يمـــن
بوعـــد
|
إنّـــه
كـــان
وعـــده
مفعــولا
|
|
وامـل
شـجوى
علـى
الحمـام
وطارح
|
بلبــل
الــدوح
واتخــذه
وسـيلا
|
|
وابكيــاني
بكــل
دمــع
نحيبــا
|
وانــدباني
بكــل
شــجو
هــزيلا
|
|
يـا
ضـليلا
عـن
الطريـق
إلـى
كـم
|
أنــت
غــاد
عـن
الطريـق
ضـليلا
|
|
إن
تكــن
بــؤت
بالمــآثم
حسـرا
|
فابـك
مثلـي
وهـل
تجـد
لي
مثيلا
|
|
واهجـــر
النــوم
ســحرة
ومقيلا
|
وارســل
الــدمع
بكــرة
وأصـيلا
|
|
والـزم
الصـوم
فـي
النهـار
ورتل
|
ذكــر
مـولاك
فـي
الـدجى
تـرتيلا
|
|
وافــن
تبــق
ومــت
تعـش
وتخلـى
|
تتحلـــى
وغـــب
تجــده
وصــولا
|
|
وارق
علــوا
إذا
تواضــعت
سـفلا
|
واحــظ
بــالعز
إن
أتيــت
ذليلا
|
|
واطــرح
النفــس
واختـذها
عـدوا
|
والــزم
الصـدق
وارتضـيه
بـديلا
|
|
واجمـل
الظـن
فـي
الجميـل
تـوفى
|
أجــر
مــن
ظـن
فيـه
ظنـا
جميلا
|
|
واحسـن
المـدح
فـي
الحبيب
لكيما
|
أن
تجـازى
بـه
الجـزاء
الجـزيلا
|
|
فهـو
طـه
الفـتى
الكريـم
المفدى
|
مفخــر
العـالم
الجليـل
الجميلا
|
|
مظهــر
المجـد
والكمـال
المرجـى
|
أحمــد
المرتضـى
الحفـي
الحفيلا
|
|
أكــرم
العــالمين
روحـا
وذاتـا
|
وصــــفاتا
ومعشــــرا
وقبيـــل
|
|
عــز
قــدرا
ومنتصــبا
ومقامــا
|
يــا
لــه
مصـطفى
نـبيئا
رسـولا
|
|
ظــاهرا
مقتضــى
ســراجا
منيـرا
|
طـــاهرا
مجتــبي
حبيبــا
خليلا
|
|
أفضــل
الخلــق
صـفوة
الحـق
طـه
|
زاده
اللـــه
عنـــده
تفضـــيلا
|
|
صــاغه
اللــه
مــن
بهـاء
ونـور
|
فغـــــدا
كـــــاملا
جليلا
جميلا
|
|
كمـــل
اللـــه
وصـــفه
وحمــاه
|
وحبــــاه
بمـــا
حـــبى
تكميلا
|
|
واصــطفاه
عــن
السـوا
واجتبـاه
|
وأراه
وجـــه
الجمـــال
الجليلا
|
|
وارتضــــاه
مشـــفعا
ووجيهـــا
|
وإمامــــــا
وشـــــاهدا
وكيلا
|
|
وبــه
قــد
دعــا
الأنــام
إليـه
|
وعليــه
قــد
أنــزل
التنــزيلا
|
|
محكمــا
صــادقا
بشــيرا
نـذيرا
|
شـــاهدا
مرشــدا
مبينــا
دليلا
|
|
قـد
حـوى
الصـحف
والزبور
والألوا
|
ح
وحــــاز
التـــوراة
والإنجيلا
|
|
علـــم
الخــط
وهــو
أمــي
خــط
|
وأبـــان
المنقــوط
والمهمــولا
|
|
وروينــا
عنــه
العلــوم
فهمنـا
|
أن
فهمنــا
المعقـول
والمنقـولا
|
|
أم
بالرســـــل
والملائك
لمــــا
|
أرســـل
اللــه
خلفــه
جــبريلا
|
|
وأتــى
بــالبراق
كــي
يمتطيــه
|
فامتطــاه
وســار
ســيرا
عجـولا
|
|
وارتقــى
يخـرق
الطبـاق
إلـى
أن
|
جــاوز
الحجــب
رفعــة
ووصــولا
|
|
ورأى
الحــق
كيــف
شــاء
جهـارا
|
حيـــث
لا
مثــل
يــدعى
ومــثيلا
|
|
ويقـــرب
دنـــا
فكـــان
كقــاب
|
بـــل
وأدنـــى
محبّــة
وقبــولا
|
|
واجتبـــاه
مكانـــة
واقترابــا
|
واصــطفاه
بمــا
اصـطفى
تنـزيلا
|
|
ودعـــاه
بـــأنت
خيــر
عبــادي
|
لسـت
أبغـي
بمـا
ابتغيـت
بـديلا
|
|
أنــت
منــي
كمــا
رأيـت
فشـاهد
|
نــور
وجـه
حيـرت
فيـه
العقـولا
|
|
ولــك
الفخــر
قـد
بلغـت
مقامـا
|
لــم
يشــاهد
لــه
ســواك
عـدلا
|
|
أنــا
أدنــى
إليـك
منـك
ولـولا
|
وصــلتي
لــم
تكــن
إلـيّ
وصـولا
|
|
يـا
هنـا
قلبـا
وقر
عينا
فقد
ما
|
كنـــت
عبـــدا
وســـيدا
وجليلا
|
|
وابشــر
آبشـر
فقـد
غـدوت
نجيـا
|
وحبيبــــــا
وصـــــفوة
وخليلا
|
|
أنـــت
ســري
ومظهــري
ومــرادي
|
فلـــك
الأمــر
لا
تحــق
تحــويلا
|
|
وانثنــى
راجعــا
بــأنجم
ســعي
|
وجــواري
الــدجى
تجـر
الـذيولا
|
|
وببطحــا
المقــام
أصــبح
ينـبى
|
عـــن
ســـراة
لصــحبه
تفضــيلا
|
|
يــا
هنانــا
وسـعدنا
أن
دعانـا
|
فأجبنــاه
واقتفينــا
الســبيلا
|
|
ونطقنـــا
بلا
إلـــه
ســوى
عــن
|
كــون
الكــون
واصــطفاه
رسـولا
|
|
مــن
بــه
أنقـذ
المهميـن
شـيتا
|
وأبـــــاه
ويونســــا
والخليلا
|
|
وحمـــى
صـــالحا
بــه
وشــعيبا
|
وســليمان
والفــتى
وإســماعيلا
|
|
وبــه
إســحاق
أنيــل
والأســباط
|
وهـــارون
بلغـــوا
المـــأمولا
|
|
وليعقـــوب
باســمه
نــال
ســرا
|
صـــير
الطــرف
بالضــياء
كحيلا
|
|
وبــه
إدريــس
قــد
أجـل
ويحيـى
|
وبـــه
إليــاس
والعزيــز
أنيلا
|
|
وكفــى
يوســفا
وهــودا
ولوطــا
|
ويهــــودا
ويوشــــعا
والكفيلا
|
|
وبــــه
ســـخر
الإلـــه
لـــداو
|
د
جديــــدا
وطيـــرا
وتلـــولا
|
|
وبــــه
لاذ
إذ
دعــــا
زكريـــا
|
فاســتجيب
الــدعا
وكــان
كفيلا
|
|
وبــه
الخضــر
والكليــم
أعــزا
|
وبــه
نــوح
والمســيح
اسـتطيلا
|
|
مــن
بــه
الرســل
والملائك
لاذوا
|
فروعـــوا
وردا
وعــزوا
قفــولا
|
|
مــن
بــه
أنطــق
الهواتــف
وال
|
جـن
والأصـنام
والظـبي
والوعـولا
|
|
أكــرم
الإنــس
مولــدا
ورضــاعا
|
وشــــبابا
وشــــيبا
وكهـــولا
|
|
مــن
بمبــداه
شـق
إيـوان
كسـرى
|
وغـــدا
مـــاحواه
رســما
محيلا
|
|
مــن
لــه
غـاض
مـاء
سـاوة
لمـا
|
خمــدت
نــار
مــن
أقـام
ضـليلا
|
|
مـن
لـه
البـدر
شـق
نصـفين
شوقا
|
ولــه
الجــذع
حــن
حنـا
طـويلا
|
|
مـن
لـه
الظـل
قـد
اميـل
هجيـرا
|
ولــه
الشـمس
قـد
أعيـدت
أصـيلا
|
|
مـن
حمـاه
الحمـام
في
الغار
لما
|
نســـج
العنكبــوت
ســترا
حفيلا
|
|
مـن
كفـى
الألـف
بالصـواع
وأرقـى
|
بيســير
الحليــب
جمــاء
مهـولا
|
|
مـــن
يكفيـــه
صـــلدم
وطعــام
|
ســبحا
الواحـد
الجليـل
الجميلا
|
|
مــن
بنفــث
أعــاد
شــق
خــبيب
|
وبتقــل
كفــى
الســيم
الـذبولا
|
|
مــن
بمســح
أرى
للأقــرع
شــعرا
|
وبمســح
شــفى
العـويلا
الـدخيلا
|
|
مـــن
بمســح
أدرع
ضــرع
عنــاق
|
لــم
تكـن
قبـل
تسـتلد
الفحـولا
|
|
مــن
بمســح
أعــاد
فــوق
محيـا
|
عــائد
الخيــر
والتقـى
قنـديلا
|
|
مــن
بتفــل
أعــاد
ملــح
أجـاج
|
ســائغ
الشــرب
سلســلا
سلسـبيلا
|
|
مــن
وقــاه
الغمــام
حـر
وهيـج
|
ولــه
وجــاد
إذ
دعــاه
همــولا
|
|
مـن
لـه
أنقـاد
أشوس
العير
طوعا
|
ولـــه
دان
حيــث
كــان
جفــولا
|
|
مـن
أجـار
البعيـر
مـن
ضـر
نحـر
|
وكفــــاه
العــــذاب
والتثقيلا
|
|
مــن
لـه
الـوحش
خـاطبت
وأطـاعت
|
ودعــا
النخــل
فاسـتحبن
مثـولا
|
|
مــن
أعـاد
القضـيب
بـالهز
لمـا
|
إن
غــزا
بــدرا
صـارما
مصـقولا
|
|
مــن
كفــاه
الإلــه
شــر
قريــش
|
ليلـة
الـدار
حيـث
سنوا
النصولا
|
|
مــن
دعــا
للهــدى
فصــدق
بــر
|
وانثنـى
الفـاجر
الكفـور
خـذولا
|
|
مـن
فـدى
الظـبي
إذ
أتـاه
أسيرا
|
فغــدى
الظــبي
يعلــن
التهليلا
|
|
مــن
لـه
الضـب
قـال
أشـهد
ربـي
|
أن
طـــه
أتــى
إليكــم
رســولا
|
|
مــن
لــه
أنبــأ
الــذراع
بسـم
|
إذ
لــه
قــدم
العـدا
المـأكولا
|
|
مـن
شـفى
العيـن
بريقـه
وسـقاها
|
وامتطاهــا
لمــا
أراد
الـرحيلا
|
|
مـن
بتفـل
أعـاد
كـف
ابـن
عفـرا
|
بعــد
قطــع
وكــم
أمــد
هيـولا
|
|
مــن
بنبــع
الـزلال
مـن
راحـتيه
|
كــم
سـقى
ظـامئا
وأجـرى
سـيولا
|
|
كـــم
جلا
ظلمــة
وأظهــر
نــورا
|
كــم
شــفى
علــة
وأبــرا
عليلا
|
|
كــم
كفــى
كربــة
وفــرج
غمــا
|
كــم
هــدى
حــائرا
وسـن
سـبيلا
|
|
كــم
سـبى
مترفـا
وأغنـى
فقيـرا
|
كــم
جفـى
قاطعـا
وأدنـى
وصـولا
|
|
كــم
عمــى
مبصــرا
ويصـر
عميـا
|
وكــم
سـبى
قـاتلا
وأحيـا
قـتيلا
|
|
كــم
حــوى
معجـزا
وأعجـز
خلقـا
|
كـــم
أرى
آيـــة
وأبــدى
دليلا
|
|
لــم
تلـد
مثلـه
الحوامـل
فضـلا
|
لا
ولا
تلــــق
مثلـــه
تفضـــيلا
|
|
قـاد
قومـا
إلـى
الجهـاد
كرامـا
|
صـــبرا
غلبــا
ليوثــا
فحــولا
|
|
وضــعوا
الشــرك
والهـدى
حملـوه
|
فأبـانوا
لنا
الموضوع
والمحمولا
|
|
وحمــوا
دينهــم
وصــانوا
علاهـم
|
ودعــوا
ربهــم
وأمــوا
الرسـلا
|
|
فعلــوا
فــي
العـدو
فعـل
مجـاز
|
فغــدا
فاعــل
العــدا
مفعــولا
|
|
وشـــروا
بــالنفوس
جنــة
عــدن
|
إذ
شــرى
بــائع
الهــدى
سـجيلا
|
|
كتبــوا
بالظبــا
حــروف
جســوم
|
نقطتهــــا
رمـــاحهم
تشـــكيلا
|
|
وجلــوا
آيــة
العــدا
وأجلــوا
|
آيـة
الـدين
إذ
أجـالوا
الخيولا
|
|
أحكمـوا
الطعـن
والضـراب
فبنـوا
|
لعــــداهم
أســــنة
ونصــــولا
|
|
كــم
بنــوا
بيــت
طاعـة
تممـوه
|
ببـــــــديع
مجنــــــس
تكميلا
|
|
ترجــو
الــدين
إذ
كســوه
حليـا
|
بصــــفات
صـــاغت
لـــه
إكليلا
|
|
ونهــوا
زائغــا
ونـادوا
رشـيدا
|
وحبـــوا
راحلا
وراعـــوا
نــزلا
|
|
يرتجـــون
الرضــا
بطاعــة
طــه
|
لا
يخــافون
فــي
الإلــه
مهــولا
|
|
فهـم
الشـهب
فـي
الـدجى
تنـويرا
|
وهـم
السـحب
فـي
العطـا
تنـويلا
|
|
وهـــم
الزهــر
بهجــة
وارتقــا
|
وهـــم
الزهــر
نســمة
وهيــولا
|
|
مـن
كشـيخ
التقـى
الخليفـة
صدقا
|
أو
كفــا
روقــه
الأميـر
الجليلا
|
|
أو
كعثمــان
ذي
العلا
والمعــالي
|
أو
علــــي
الفـــتى
الفعـــولا
|
|
أو
كعميــــه
والبنيـــن
وســـب
|
طيــه
وأزواجــه
رضــا
وقبــولا
|
|
أو
كأصـــحابه
الـــذين
ترقــوا
|
مرتقــى
شــامخا
عريضــا
طـويلا
|
|
مــــن
يســـاميهم
علا
وفخـــارا
|
أو
يحـــــاكيهم
فعــــالا
وقيلا
|
|
أو
يقـول
السـها
يحـاكي
الثريـا
|
أو
يــرى
الطـرف
يعتلـي
الإكليلا
|
|
أمهــم
فــي
جوامـع
الحـرب
حـبر
|
صـير
العضـب
فـي
الـورى
قنـديلا
|
|
سـل
بنـي
الحـرب
عـن
يـديه
وعرج
|
لبنــي
السـلم
واحسـن
التمـثيلا
|
|
تجـد
الغيـث
فـي
البطـاح
مطيـرا
|
وتــرى
الليــث
للشــباة
قتـولا
|
|
مـن
حـوى
التـاج
والبراق
المعلى
|
ولــوا
الحمـد
والمقـام
الجليلا
|
|
مــن
لـه
الحـوض
والشـفاعة
لمـا
|
تعتــدي
الخلــق
هـائمين
ذهـولا
|
|
تــأته
الخلــق
جـازعين
ينـادوا
|
قـم
لنـا
اشفع
بمن
كساك
القبولا
|
|
فبنـادي
أنـا
لهـا
مثـل
مـا
هـي
|
لــــي
أيضـــا
مخبـــؤة
تكميلا
|
|
ويحىــء
الشــفيع
يســجد
طوعــا
|
تحــت
عـرش
الإلـه
يرجـو
الكفيلا
|
|
وينــاجي
بأحســن
الحمــد
شـكرا
|
ويجيــــد
التحميـــد
والتهليلا
|
|
وينـــادي
ألا
لـــه
مــن
بوعــد
|
إنـــه
كـــان
وعـــده
مفعــولا
|
|
فينــادي
إرفــع
مـن
الأرض
رأسـا
|
طـال
مـا
خـر
لـي
زمانـا
طـويلا
|
|
وقـل
اسـمع
واشـفع
تشـفع
وسـلني
|
أعطـك
السـؤل
والرضـا
المـأمولا
|
|
فـــــوعزي
لأقســـــمن
ســــواء
|
جملــة
اليــوم
بيننــا
تفضـيلا
|
|
فتنــــادي
شـــفاعتي
وأنـــادي
|
رحمــتي
تغمــر
العصــاة
شـمولا
|
|
هــو
غــوثي
وحبــذا
هــو
غــوث
|
هــو
ســؤلي
وحبــذا
هــو
سـولا
|
|
مـا
نبـا
الـدهر
بـي
ورمـت
حماه
|
مســـــتغيثا
إلا
أغــــاث
منيلا
|
|
لا
ولا
خفـــت
والتجـــأت
إليـــه
|
مســـــتجيرا
إلا
أجــــار
كفيلا
|
|
لا
ولا
رمـــت
بالتطفـــل
أدلـــى
|
مســـــتنيلا
إلا
أنـــــال
جميلا
|
|
حـــاش
واللــه
أن
يضــيق
عنــي
|
جـاهه
الشـامل
العريـض
الطـويلا
|
|
أو
يصــول
الضــنى
علــي
وقلـبي
|
صـــار
فيـــه
متيمــا
متبــولا
|
|
أو
أرى
القــبر
حفــرة
لعــذابي
|
وأمــاني
بــه
وقــاني
المهـولا
|
|
كيــف
أخــزى
وقــد
مننـت
برحـب
|
فــي
منـام
أقـر
طرفـي
الكليلا
|
|
أو
أرانــي
علـى
الجنـان
طريـدا
|
بعـــدما
صـــرت
للجنــان
دخيلا
|
|
يـا
فـتى
العـرب
قـد
أتيت
دخيلا
|
وأرى
العــرب
لا
تــرد
الــدخيلا
|
|
وقصـــدت
الحمـــى
وجئت
نــزيلا
|
فـارغ
نزلي
فالعرب
ترعى
النزيلا
|
|
وتوســــلت
بامتــــداحك
علـــي
|
أن
أنــال
الجــزا
بــه
تنـويلا
|
|
حـــاش
عليــاك
أن
تخيــب
صــبا
|
قــرع
البــاب
بالمديــح
سـؤولا
|
|
أنــت
أوفـى
مـن
أن
تـرد
وأسـخى
|
باسـما
الجـود
أن
تنيـل
القليلا
|
|
أنــت
أعلـى
مـن
مـدح
كـل
قـؤول
|
يـا
لعمـري
فمـا
عسـى
أن
أقـولا
|
|
وبـــذات
الإلـــه
أقســـم
حقــا
|
قســـما
صـــادقا
عظيمــا
جليلا
|
|
لــو
تكــون
الأفلاك
والسـحب
طـرا
|
والأراضــي
الجميـع
درجـا
طـويلا
|
|
والنبــات
الممــد
يضـحى
يراعـا
|
وميـــاه
الوجــود
حــبرا
كحيلا
|
|
وجميـــع
الأنــام
تصــرع
كتبــا
|
أبـــد
الـــدهر
وصـــفه
تجميلا
|
|
لــم
يوفــوا
بعشــر
عشـر
صـفات
|
قــد
حباهـا
الإلـه
طـه
الرسـولا
|
|
وبمــاذا
يفــي
الجميــع
وقـدما
|
أودع
اللـــه
مــدحك
التنــزيلا
|
|
غيــر
أنــي
جعلــت
مـدحك
حصـنا
|
لأوفــي
بــه
المخــوف
المهــولا
|
|
وتطفلـــت
يـــا
جــواد
لعلمــي
|
أن
مـــن
جــاء
يقبــل
التطفيلا
|
|
فــاكتنفني
بســر
جاهــك
وآسـبغ
|
يـــــا
ملاذي
علـــــي
ظلا
ظليلا
|
|
وآجـر
امـري
علـى
الجميـل
فطنـي
|
لــم
يــزل
والظــن
فيــم
جميلا
|
|
أخطــأ
المــدعي
لحســنك
شــبها
|
يـا
سـنا
واضـح
الهـدى
أو
مثيلا
|
|
شـــرفا
كـــاملا
وفصــلا
بســيطا
|
ونــدى
وافــرا
وفخــرا
طــويلا
|
|
هكــذا
هكــذا
تنــال
المعــالي
|
ليــس
مــن
جـاد
أدرك
المـأمولا
|
|
مــا
قضــى
اللـه
لا
ينـال
يسـعى
|
يـا
أخـا
الحـزم
فاترك
التعليلا
|
|
وإلــى
اللــه
أشـتكي
مـا
ألاقـي
|
يــا
شـكاة
الضـنى
فصـبرا
جميلا
|
|
وإليـــه
أبكــي
وأضــرع
خوفــا
|
مـن
ذنـوب
أو
قـرن
ظهري
الهزيلا
|
|
فعســى
أو
لعــل
يشــكف
مـا
بـي
|
عــن
مـا
بـي
أعـاد
رسـمي
محيلا
|
|
هـــو
حســبي
وناصــري
ووكيلــي
|
حســـبي
اللـــه
ناصــرا
ووكيلا
|
|
يـــا
رجـــائي
وملجئي
وغيــاثي
|
كــن
بمــا
أرتجيــه
منـك
كفيلا
|
|
يــا
حبيــبي
ومؤنســي
وجليســي
|
أنــت
أدنــى
منــي
إلـي
وصـولا
|
|
أنــا
عبــد
وأنــت
رب
ومـن
لـي
|
إن
تكــن
معرضــا
لكـوني
جهـولا
|
|
أنـــا
ذوحاجـــة
وأنــت
جــواد
|
وراينــا
الجـواد
يـولي
الجميلا
|
|
أنـــا
ذو
فاقـــة
وأنــت
غنــي
|
وعهــدنا
الغنـي
يعطـي
الجـزيلا
|
|
فاشــف
ضـري
وعـافني
واعـف
عنـي
|
وأنلنـــي
حنانـــك
المبـــذولا
|
|
واكفنـــي
ضـــر
مقلــتي
ونــور
|
بــالتقى
بـاطني
وكـن
لـي
دليلا
|
|
وأجرنــي
مــن
الـذنوب
وكـن
لـي
|
حيــث
لا
ينفــع
الخليـل
الخليلا
|
|
وأوف
دينـــي
ونجنـــي
وتصـــدق
|
واكتــب
الآن
لــي
بــذاك
وصـولا
|
|
وأولنــي
الخيــر
راحلا
ومقيمــا
|
واكفنــي
الشــر
ســائلا
ومسـولا
|
|
وأمتنــي
علــى
الشـهادة
وارحـم
|
عبـدك
البـائس
الفقيـر
الـذليلا
|
|
وصـن
الملـك
بالمليـك
أبـي
عمرو
|
والإمــام
الرضـا
الكفـي
الكفيلا
|
|
واعنــه
وانصــره
نصــرا
عزيـزا
|
وأنلـــه
النـــوال
والتنــويلا
|
|
واكتنفــه
واختــم
لــه
بجميــل
|
وابقـــه
للـــورى
بقــاء
جميلا
|
|
واحفـظ
العهـد
بالعمـاد
المرجـى
|
ذي
الأيادي
المسعود
معطي
الجزيلا
|
|
واعـــف
عنـــه
وعــافه
وأنلــه
|
مـــا
يرجيــه
واكفــه
التعطيلا
|
|
واســبل
الســتر
حــوله
وعليــه
|
وأدم
عــــزه
دوامـــا
طـــويلا
|
|
واسـتر
ابـن
الخلـوف
واشـف
اذاه
|
وأتــه
الخلــد
واكفــه
ســجيلا
|
|
وامنــح
الوالــدين
عفـوك
وارزق
|
إخــوتي
والبنيـن
منـك
القبـولا
|
|
وارحــم
أشــياخي
الهـداة
ونـول
|
معشــر
المســلمين
فصــلا
جـزيلا
|
|
واقــض
بـالعود
للحمـى
والمصـلى
|
لــرى
الــبيت
والمقـام
الحفيلا
|
|
وأوالــي
الطـواف
والسـعى
شـكرا
|
وأراعـي
الصـفا
وأرعـى
السـبيلا
|
|
وأعــــدني
لطيبــــة
وقباهـــا
|
لأزور
المشـــــفع
المقبـــــولا
|
|
وأريــح
المطايـا
فيهـا
إلـى
أن
|
يقضــي
اللــه
أمــره
المفعـولا
|
|
وأرى
فــي
ثــرى
البقيـع
دفينـا
|
وألقــــى
جـــواره
المـــأمولا
|
|
فاسـتجب
لـي
بمـا
اسـتجبت
لنـوح
|
ولأيــــــوب
إذ
أتـــــاك
دخيلا
|
|
وأغثنـــي
بمــا
أغثــت
عتيقــا
|
وعليــــــا
وجعفـــــراً
وعقيلا
|
|
واكتنفنــي
بمــا
اكتنفــت
بلالا
|
ورباحــــا
ورافعـــا
ونـــبيلا
|
|
واصـطنعني
بمـا
اصـطنعت
الحميرا
|
وزليخـــا
ومريمـــا
والبتــولا
|
|
وتفضــــل
بســـح
ســـحب
صـــلاة
|
تشــمل
السـيد
الحـبيب
الرسـولا
|
|
وعلـــى
الآل
والصـــحابة
طـــرا
|
حــافظي
دينـه
الثقـاة
العـدولا
|
|
مــا
أجــاب
الإلــه
عبـدا
ذليلا
|
قـــام
يــدعوه
بكــرة
وأصــيلا
|