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أيكـــــفي
بكــــائي
ودمعـــي
دمـــــاءُ
|
ومـثـلُـــك
َيـبـكــي
عـليــهِ
البـكـــاءُ
|
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وَأسهَــــل
ُمـــا
فــي
العـــيون
ِالــدموع
|
وأصعَـــبُ
مــا
فــي
الكـــلام
ِالرثــــاءُ
|
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وَلــكـــنـنـــي
انــتــقـــي
أحــرُفـــي
|
كـــما
تـنـتــقي
دَمـعَــها
الكِـبـريَــاءُ
|
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وَأعْـجَـــــز
ُمـــــني
رثـــــائي
،
وأدري
|
أمَـامَــــك
َكــــلّ
ُالمـرَاثِــي
هَـــبَـــاءُ
|
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أقـــــل
عــــثرتي
بالأســــى
فــــدموعي
|
غيـــــوم
وأهــــداب
عينــــي
ســــماء
|
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وَقـفـــت
َكــــأنْ
لـــمْ
يَـقِـــفْ
وَاقِــــفٌ
|
كـــما
شِـئـــت
َموتَـــكَ
لا
مَـــا
يَـشــاءُ
|
|
تــوَارَى
إلــى
حيــث
ُمـــا
فــي
الــوَرَاء
|
وَرَاء
ٌوَمـــا
فـــي
الخـفـــاءِ
خـفــــاءُ
|
|
تـدَارَكـتَـــه
ُمـشــفِـقـــا
ًفـارتـقـيـــتْ
|
وَأعــيَـــا
لـحَـاقـــا
ًبــك
َالإرتِـقـــاءُ
|
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فكـيــــفَ
بـمــــوتٍ
كـمـوتِــــك
َهــــذا
|
نُعَـــــزّى
،
وكــــيفَ
يكـــون
ُالعَـــزَاءُ
|
|
وَمـــا
الفخـــرُ
فـــي
أنْ
تُعِيــقَ
الأســودَ
|
قـيــــودٌ
فـتـجْــرَاعـلـيـــها
الجِــرَاءُ
|
|
أقــــول
ُلنـفــــسي
اهــــدَأي
فالــدموع
|
جــــدَارٌ
يُــثــقـِّـبُــــه
ُالإتِــكـــــاءُ
|
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أعـيــــذكِ
أنْ
تـفـســــحي
لـلـعَــنـــاء
|
طـريـقــــا
ًفيهـــربُ
مـنــكِ
العَــنــاءُ
|
|
أعَـيـــذ
ُالـتـفـاتــاتِـــكِ
الموجـعَـــات
|
يُــعَــــاقُ
بـأقــدَامِـهــن
َاقــتِــفــاءُ
|
|
وَأنـــتِ
الوَفِــيِّــــة
ُحـيـــث
ُالوَفــــاء
|
شـحِيـــــح
ٌوَحَيــــث
ُالدمـــــوع
ُازدِرَاءُ
|
|
إذا
مــا
رأيـــتِ
انـحِـنـــاءَ
النـفـــوس
|
كــبـيـــرٌعلى
مـثــلِــــكِ
الإنـحِــنــاءُ
|
|
فلا
تـعجــــبي
مِـــن
بَـغــــاءِ
الزمـــان
|
فأشـــرَفُ
مــا
فــي
الزَمـــان
ِالبَـغــاءُ
|
|
أُقــــدِّم
ُحـــزني
أنــيــقـــا
ًلِـمـيْـــتٍ
|
أنـيــــق
ٍويُـرجِـــفُ
كـــفّي
الحَـيَــــاءُ
|
|
تـقـــــوَّسَ
ضِـلعِــــي
عــــلى
قــبــــرِهِ
|
وَزُرّ
َعـــلى
جَـــانِــبـــيــــهِ
الــردَاءُ
|
|
وَمـــا
اظْــلَـــمّ
َأفـــــقٌ
وَأعْــتـــم
َإلا
|
أضــــاءَ
،
فكــــلّ
ُشـحُــــوبي
يُـضَـــاءُ
|
|
وَلَـــمْ
أخــــفِ
طــابــوقــــه
ُخِـيـفـــةً
|
ولـــمْ
أطــــل
ِوَجهــي
لغيــري
الطِـــلاءُ
|
|
وَيَــا
طـــالما
قيـــل
َمـا
أنــت
َوَالوَهْــ
|
مُ
أضـحَـــك
ُبــــلْ
مــا
أنــا
وَالرِّيَـــاءُ
|
|
ولـــــم
ْيَـلتـفِـــــتْ
وَجَعـــي
والمَســـَار
|
لــــه
ُمـــن
حَـــوَافر
ِخيلــي
اكـتِـــوَاءُ
|
|
تـمُـــــرّ
ُأمـــامــــي
نـتــوءَاتُــهُـــمْ
|
وَكـــــلّ
ُتـجَـاعِــيــدِهِـــنَ
انـتِـشـــــاءُ
|
|
تُـكـابـــــرُ
ظـــــلمتُهُمْ
أنْ
تُـعِـيـــــقَ
|
ضــــيائي
وكيــــفَ
يُعَـــــاقُ
الضــــياءُ
|
|
وَأوجِـــــدُ
عُــــذرَا
ًلـهــذا
الغــبـــاء
|
وَأعْـجَـــــز
ُأنْ
يُـعــــذرَ
الأغـبـيَــــاءُ
|
|
وَمــــا
هــــالني
مُجحِـــفٌ
،
أو
أطــــالَ
|
وقــــوفي
أمــــام
َالخِـــوَاءِ
الخِـــوَاءُ
|
|
وكــــم
ْمِـــن
دَعِـــيّ
ٍرَمَــــاه
ُالزمـــان
|
أمـــامي
،
وكُـثــــر
ٌهمــو
الأدعِـيَـــاءُ
|
|
فـيَعـلَــــقُ
فــــوقَ
حِـــذائي
غُـبَــــارا
ً
|
وَأشــفَـــقُ
مـنـــي
عـلـيـــهِ
الحِـــذاءُ
|
|
غــــريبٌ
وأوجَـــع
ُمـــا
فـــي
الغـــريب
|
التِـفــاتـــاتُــــه
ُوالــدروبُ
انــزوَاءُ
|
|
يُـرَّبِـــــت
ُفـــــوق
َظـهـوراِلمـسَـافــــا
|
ت
ِ،
لا
تنطـــــفيءْ
أيهـــا
الإنطِـفــــاءُ
|
|
ويَـــــرمي
بعـــــينيهِ
صـــوبَ
العِـــرَاق
|
وَيَـمــــلأ
ُتـلـويـحَــتـيـــهِ
الرجَـــــاءُ
|
|
أطِــــلْ
بَــــال
َكــفّــيـــك
َإن
َّالمَـــدَى
|
نحِـيــــفٌ
،
ومـــا
للأكُـــــفِّ
اعـتِـــلاءُ
|
|
وَصـــِحْ
مِـــن
بعـيــــدٍ
سَــــلام
ٌعـليـــك
|
وصــــوت
ُالغريـــبِ
المُعَــــنّى
عُــــوَاءُ
|
|
ســـلام
ٌعلـــى
الســـيفِ
قـــدْ
أغـمـــدُوه
|
وذي
الأرضُ
غمـــــد
ٌلــــه
ُوارتِـقـــــاءُ
|
|
ســـلام
ٌعلـــى
القـــبر
ِكيـــفَ
اســـتطاعَ
|
اتـسَـاعـــا
ًلـيُـدفـــنَ
فيــهِ
الضِـيَــاءُ
|
|
سَــــــلام
ٌعلــى
دَمــعَـــــةٍ
أفـلـتــــتْ
|
يـديِّـــها
مِــنَ
الحــزن
ِوهــوَ
ابـتِـــلاءُ
|
|
وألـقـــــت
ْعـــلى
قـبـــرهِ
نـفـسَـهـــا
|
وهَـــدَّل
َثــــوبَ
اللـقـــاءِ
اللـقــــاءُ
|
|
أخـيــــرا
ًعـرفـنـــا
تمــوت
ُالجـبـــال
|
ويُـلـــقى
علــى
جـانبـيـــها
الغِـطــاءُ
|
|
فـبَـعـــــدَك
َكــــلّ
ُالعِــــرَاق
ِدمــــوعٌ
|
وَبَـعــــدَك
َكــــــلّ
ُالعِـــرَاق
ِدِمــــاءُ
|
|
وَضَـاقــــتْ
بمـوتــــاه
ُكـــلّ
ُالقـبـــور
|
وَمَـــــلّ
َمِــنَ
المــيـتـيــن
َالعَــــرَاءُ
|
|
وأبشـــع
ُمـــا
فـــي
المواجـــع
ِشـعـــبٌ
|
دِمــــاه
ُومــــاء
ُالمجـــاري
سَـــــوَاءُ
|
|
فـيــا
أيـهــا
النـائِـــم
ُالمسـتـفـيــق
|
ويــــا
أيهــا
الغـاضِـــبُ
المسـتـــضاءُ
|
|
يُـنـادِيـــــكَ
مُـسـتـنـجِــــدَا
ًحـاسِـــراً
|
وَيَـبـكِـيـــك
َقبــل
َالمـنــادِي
النِــدَاءُ
|
|
فلـيـسَـــــتْ
طِـبَـاعـــــكَ
أن
ْلا
تقــــوم
|
وأنـــتَ
فـتـــىً
مــا
احتــواه
ُاحتِــوَاءُ
|
|
يَعــــضّ
ُعـليــــكَ
العــــراقُ
اليـديـــن
|
فـفـــي
كـــــل
ِّيـــوم
ٍلـــه
ُكــربـــلاءُ
|
|
تلاقـــى
علـــى
موتِـنــــا
الخـانـعـــون
|
وكــــــلّ
ٌلــــه
ُثــــأرُه
ُوالعَـــــدَاءُ
|
|
وأمّـــــا
الدُمـــى
فهـــي
مــأمـــــورَةٌ
|
يُـؤرجحُهــــا
فـــي
الهَـــوَاءِ
الهَـــوَاءُ
|
|
ولا
بــــأسَ
مـــن
موتِـنـــا
،
مـوتُـنـــا
|
يُــبَــــرّرُهُ
الصــفـــوَة
ُالأتـقِــيـــاءُ!
|
|
وليـــس
َمُـهِـمَّــــا
ًعــويــــل
ُالنســـاء
|
لـيـــــرضى
ويسـتـمـــــتِعَ
الأصدقــــاءُ
|
|
وكـــــلّ
ٌيُـغــنـــي
لِـلـيـــــلاه
ُحـتــى
|
يَـقِـــيءَ
علــى
مَــنْ
يُغـــني
الغِـنـــاءُ
|
|
فـهَـــــذا
نــبــيّ
ٌ،،
وهــــذا
نــبــيّ
ٌ
|
لِـهَـــذا
لِــــوَاء
ٌ،،
لِـهَــــذا
لِـــوَاءُ
|
|
وَكــــلّ
ُنـــبـــيّ
ٍلـــه
ُتــابــعُـــــون
|
وكــــلّ
ُنــبـــيّ
ٍلــــه
ُمـا
يَــشــــاءُ
|
|
وأســــــأل
ُمـســتـهـــــجناً
مـــا
أراه
|
ويسـتهجــــنُ
المـبـتـلـيـــنَ
البَــــلاءُ
|
|
فـــأيّ
ُيَــــدٍ
يَـمــلــــك
ُالغــاصبـــون
|
لـكـــي
ينحـــني
فـوقهــا
الأنـبـيـــاءُ
|
|
إلـــى
أيــن
َيــا
رَفـــَّة
َالضــلع
ِتمضــي
|
تـوقــــفْ
،
فـنحـــن
ُإلـيـــك
َظِـمـــاءُ
|
|
تـوقــــفْ
قــلـيــــلاً
فـــإنَّ
الفِــــرَاق
|
طـويــــل
ٌوكـــلّ
ُالمحـبـيـــنَ
جـــاؤوا
|
|
يُـضــــــيءُ
الـوفــــــاءُ
بأضلاعِـهـــــمْ
|
وأجـمــــلُ
مــا
فــي
المُحِـــبِّ
الوفـــاءُ
|
|
تــوقــــفْ
قــلـيـــلاً
فـمـــا
للدمـــوع
|
انـتِـهـــاءٌ
ومــا
للفِــراق
ِانـتِـهـــاءُ
|
|
إلـــى
أيــــن
َيــــا
صُـبـحَـنــا
راحِــلٌ
|
فـبـعــــدَك
َكـــلّ
ُالـلـيــالي
مـسَـــاءُ
|
|
وتـبـكــيــــك
َدَجــلـــة
ُإذ
ْقــلّــمـــا
|
بكــــى
راحِــــلا
ًعــن
شواطـــيهِ
مـــاءُ
|
|
إلــى
أيـــن
َيــا
أجـمـــلَ
المـيـتـيــن
|
وكـيــــفَ
تعَــــافُ
النجـــومَ
السمـــاءُ
|
|
فـدَيـــت
َالعِـــرَاقَ
بمـــا
تـسـتـطـيـــع
|
فـهــلْ
بـعـــد
َهـــذا
الفِـــدَاءِ
فِــدَاءُ
|
|
إلــــى
حيـــن
تشـــرق
ُشـــمس
ُالعـــراق
|
ويـغـســـل
ُوجـــه
َالنـهــــار
ِالإبَـــاءُ
|
|
سَـأسـحَــــبُ
ظِــــلّي
وأرفــــعُ
قـلــــبي
|
وَدَاعــــا
ً،
وبعـــضُ
الــوَدَاع
ِلِـقــــاءُ
|