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زار
من
سار
وفي
القلب
والخاطر
أقام
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بعــد
مــا
غــاب
عـن
العيـن
أيـام
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بعـد
ما
قد
سعيت
في
حصول
الوصل
عام
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وإذا
الحاصــــــل
أضـــــغاث
أحلام
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زار
فـــاتحف
ولكنهــا
زورة
منــام
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أنقضــت
وايقظــت
عيــن
مــن
نــام
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وإذا
أنـا
علـى
مـا
يقولوا
صام
صام
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طولـــة
اليـــوم
وافطـــر
بلصــام
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مـــا
الــذي
ضــر
عــذب
المشــارق
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حــــالي
الطيــــر
صـــافي
الخلائق
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لـــو
جعـــل
زورتــه
صــدق
صــادق
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فالـدوا
الشافي
الصب
من
داء
الهيام
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فــي
لقــا
مـن
فتـن
بـه
ومـن
هـام
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وإذا
امكـن
فمنعـه
مـع
إمكانه
أثام
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حكـــــم
لازم
وللحـــــب
أحكــــام
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إن
طيـف
الحـبيب
هيـج
اشـجان
ثانيه
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فـــوق
مــا
كــان
محســوب
مكتــوب
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حيـن
بـدا
مثل
ما
اعرف
ببدوه
حاليه
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قلقــــه
فـــي
لطـــافه
وأســـلوب
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وبخــده
أثــر
هــو
دليـل
العـافيه
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والمنــام
مثــل
مــا
قيــل
مقلـوب
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يـا
رعـى
اللـه
ملاحـة
حلاه
والإبتسام
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والملــــق
والحنــــق
والتحتـــام
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وغفـــر
لـــه
خطـــا
كـــان
منــه
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وســـقى
حيـــث
مـــا
حـــل
مزنــه
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بشـــــفاعة
جمـــــاله
وحســـــنه
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وجمـع
شـملنا
بـه
علـى
أحسـن
نظـام
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واقعــد
الــبين
ألــى
بيننـا
قـام
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وإذا
فـي
المليـح
بـالغزل
تم
الكلام
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فابتــدى
بالثنــا
الطيــب
العــام
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للـوزير
الـذي
أن
قبـض
وسـط
القلـم
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حـــرك
أصــحاب
الأوســاط
والاطــراف
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وإذا
مـــد
مـــده
بــأرزاق
الأمــم
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ملأت
بيـــــت
الآحـــــاد
بــــالآلاف
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وغــذا
جهـز
الجيـش
صـار
الحـبر
دم
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فكــــأن
القلــــم
أنـــف
رعَّـــاف
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وان
خطب
في
المواقف
سمعت
حُسنَ
الكلام
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ينقســم
مثــلَ
مــا
النــاس
أقسـام
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للمعـــــادي
فحــــامه
وتبكيــــت
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والمـــــوالي
ســــلامه
وتثــــبيت
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والمحاضــــِر
ســــُمُوطَ
اليـــواقِيت
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اجتمَـع
فيـه
كمـال
الأكـابِر
عن
تمام
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وزيـــادَة
يُـــؤَرَّخ
بهـــا
العـــام
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وكَمـال
الـوزير
مـن
سـعادات
الإمـام
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دامَ
ولا
زالَ
منصـــــــــــُور
الاعلام
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