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يـا
معشـر
البلغـاء
هـل
مـن
لـوذع
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يهــدى
حجــاه
لمقصــد
لــم
يبـدع
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انــي
هممــت
بــان
اقــول
قصـيدة
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بكــرا
فاعيــاني
وجــود
المطلــع
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لكـم
اليـد
الطـولى
علـي
ان
انتـم
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الفيتمــــوه
ببقعـــة
او
موضـــع
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فاسـتعملوا
النظـر
السديد
ومن
يجد
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لــي
مــا
احــاول
منكــم
فليصـدع
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وحـذار
مـن
خلـع
العذار
على
الديا
|
ر
ووقفــة
الــزوار
بيــن
الاربــع
|
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وافاضــة
العــبرات
فــي
عرصـاتها
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وتـــردد
الزفــرات
بيــن
الاضــلع
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وذعـوا
السـوانح
والبوارح
واتركوا
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ذكــر
الحمامــة
والغــراب
الابقـع
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وبكـاء
اصـحاب
الهـوى
يـوم
النـوى
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والقـــوم
بيـــن
مـــودع
ومشــيع
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وتجنبــوا
حبــل
الوصـال
وغـادروا
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نعــت
الغـزال
اخـي
الـدلال
الاتلـع
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وسرى
الخيال
على
الكلال
الراكب
الش
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شـــملال
بيــن
النــازلين
الهجــع
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ودعـوا
الصـحارى
والمهـارى
تغتلـي
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فيهـــا
فتفتلهـــا
بفتـــل
الاذرع
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وتواعــد
الاحبــاب
احقــاف
تغتلـي
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ليلا
وتشـــقيق
الـــردا
والــبرقع
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وتهــادى
النسـوان
بالاصـلان
فـي
ال
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كثبــان
مــن
بيـن
النقـا
والاجـرع
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والخيــل
تمــزع
فـي
الاعنـة
هزبـا
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كيمــا
تفــزع
ربربــا
فــي
بلقـع
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والزهــر
والــروض
النضـير
وعرفـه
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والــبرق
فــي
غـر
الغمـام
الهمـع
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والقينــة
الشــنبا
تجـاذب
مزهـرا
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والقهــوة
الصــهبا
بكــأس
مــترع
|
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وتحــادث
الشــمار
بالاخبــار
مــن
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إعمـــار
دولـــة
قيصــر
أو
تيــع
|
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وتناشـد
الأشـعار
بالأسـحار
فـي
الل
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تمـــار
ليلـــة
عشــرها
والأربــع
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وتــداعي
الأبطـال
فـي
رهـج
القتـا
|
ل
إلــى
النــزال
بكـل
لـدن
مشـرع
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وتطــارد
الفرســان
بالقضـبان
وال
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خرصـــان
بيـــن
مجـــرد
ومقنـــع
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وتــذاكر
الخطبــاء
والشـعراء
لـل
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أنســاب
والأحســاب
يــوم
المجمــع
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ومنــاقب
الكرمــاء
والعلمـاء
وال
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صــلحاء
أربــاب
القلــوب
الخشــع
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فجميــع
هــذا
قـد
تـداوله
الـورى
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حــتى
غــدا
مـا
فيـه
موضـع
اصـبع
|
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مــن
مــدعي
مــا
قــاله
او
مــدع
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والمــدعي
مــا
قــال
ايضــا
مـدع
|
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واليـــوم
امـــا
ســارق
مســتوجب
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قطــع
اليميــن
وحســمها
فـاليقطع
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او
غاصـــب
متجاســـر
لــم
يثنــه
|
عــن
همــه
حــد
العــوالي
الشـرع
|
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مهمــا
رأى
يومــا
ســواما
رتعــا
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شــق
المغـار
علـى
السـوام
الرتـع
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فكـــأنه
فـــي
عـــدوه
وعـــدائه
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فعــل
الســليك
وسـلمة
بـن
الاكـوع
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والشــعر
ليـس
كمـا
يقـول
المـدعى
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صــعب
المقــادة
مســتدق
المهيــع
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كــم
عــز
مــن
قــح
بليـغ
قبلنـا
|
او
مـــن
اديــب
حــافظ
كالاصــمتي
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هـل
غـادرت
هـل
غـادر
الشـعراء
في
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بحــر
القصــيد
لـو
ارد
مـن
مشـرع
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والحـــول
يمكثـــه
زهيـــر
حجــة
|
ان
القـــوافي
لســن
طــوع
الامــع
|
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ان
القريـــض
مزلـــة
مــن
رامــه
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فهــو
المكلـف
جمـع
مـا
لـم
يجمـع
|
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ان
يتبــع
القــدما
أعـاد
حـديثهم
|
بعــد
الفهــو
وضــل
ان
لـم
يتبـع
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وتفـــاوت
الشـــعراء
امــر
بيــن
|
يــدري
الضــبي
وضــوحه
والالمعــي
|
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مـا
الشـاعر
المطبـوع
فيـه
سـليقة
|
وجبلــة
مثــل
الــذي
لــم
يطبــع
|
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ومهـــذب
الاشـــعار
بـــاد
فضــله
|
عنـد
السـماع
علـى
المعـذ
المسـرع
|
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مــا
الشــعر
الا
مـا
تناسـب
حسـنه
|
فجــرى
علــى
منــوال
ضــج
مبــدع
|
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لــو
فــظ
رقيـق
ضـم
معنـى
رائقـا
|
للفهــم
يـدنو
وهـو
نـائي
المنـزع
|
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مزجـــت
برقتــه
الجزالــة
يــاله
|
مـــن
راح
دن
بـــالفرات
مشعشـــع
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فيكــــاد
يـــدركه
الـــذكي
حلاوة
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وطلاوة
بـــالقلب
قبـــل
المســـمع
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تعــرو
القلـوب
لـه
ارتياحـا
هـزة
|
يسـخو
الشـحيح
بهـا
لحسـن
الموقـع
|
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والشـــعر
للتطريـــب
اول
وضـــعه
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فلغيــر
ذلــك
قبلنــا
لــم
يوضـع
|
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واليـــوم
صــار
منكــدا
ووســيلة
|
قـد
كـان
مقصـدها
انتنـى
لـم
تشرع
|
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واليـــه
ترتــاح
النفــوس
غلبــة
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فيميلهـــا
طبعـــا
بغيــر
تطبــع
|
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ينســــاغ
للاذهــــان
اول
مــــرة
|
ويزيــد
حسـنا
ثانيـا
فـي
المرجـع
|
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فيخـال
سـبق
السـمع
مـن
لـم
يستمع
|
ويعــود
ســامعه
كــأن
لــم
يسـمع
|
|
واذا
عرفــت
لــه
بنفســك
موقعــا
|
تحتـــاره
يهــدى
لــذاك
الموقــع
|
|
مــن
كــان
مســطاعا
لــه
فليـأته
|
واليقــي
راحتــه
امـرؤ
لـم
يسـطع
|
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والجــل
مــن
شـعراء
اهـل
زماننـا
|
مــا
ان
ارى
فــي
ذالـه
مـن
مطمـع
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