|
طـال
فـي
أربـع
القـرار
قراري
|
ليـت
شعري
ما
لي
ومال
القراري
|
|
طـال
مكـثي
وانمـا
طـال
فيهـا
|
باختيـار
المليـك
لا
باختيـاري
|
|
لـم
اكـن
مزمـع
القـدوم
اليها
|
بـل
رمتنـي
لهـا
يـد
الاقـداري
|
|
ســئم
القلــب
بردهـا
ونـداها
|
وخلاهـــا
البليــل
بالاســحاري
|
|
وكـــداها
وقاعهـــا
وصــواها
|
وحصــاها
ومـا
حـوى
مـن
غبـار
|
|
وصــفيا
بهــا
كحــد
المواسـي
|
وجــذوعا
بهــا
كحــد
الشـفار
|
|
ليـت
شـعري
والعبـد
ذو
اجبـار
|
وهـو
يبـدو
فـي
قـالب
المختار
|
|
حيـث
تبـدو
لـك
المعـالم
غـزا
|
حســنها
ســر
اعيــن
النظــار
|
|
نمقتهــا
يــد
الحيــا
بلعـاع
|
شـلب
حسـن
ابيضاضـها
باخضـرار
|
|
تلـك
ارضـي
الـتي
احـب
واهـوى
|
وهــي
حتــا
منــازل
الاحــرار
|
|
عذبـة
المـاء
ليـس
ينبـت
فيها
|
شـــجر
غيـــر
طيــب
الاشــجار
|
|
تنبـت
الشـرح
والسـيال
وارطـى
|
حاكيا
في
الرمال
واهم
العذارى
|
|
لا
بلاد
مياههـــــا
خمجريــــر
|
منبتــات
طعــام
اهــل
النـار
|
|
ســكنتها
غوغــاء
تنفـك
فوضـى
|
لـم
تمـر
بيـن
ليلهـا
والنهار
|
|
طرقتــك
الهمــوم
وهــي
سـوار
|
فبمـــاذا
لنبغهـــا
انتقــار
|
|
مــا
قـرى
طـارق
البلابـل
عـار
|
مثــل
اعمــال
يعملات
المهـارى
|
|
صــحبتي
شـمروا
فلـم
يبـل
الا
|
شــد
فتــل
المطــي
بـالاكواري
|
|
قربوهـــا
بـــويزلات
عليهـــا
|
مــن
كراهـا
كعاليـات
المنـار
|
|
فـــذراها
لركبهـــا
ضــامنات
|
بعـد
شـحط
المـزار
قرب
المزار
|
|
سـلخت
فـي
الربيـع
شـهر
جمادى
|
تتــــوخى
مواقـــع
الامصـــار
|
|
ملكتهــا
رعاتهـا
الامـر
دهـرا
|
ترتعـي
مـا
شـاءت
مـن
الازهـار
|
|
فهــي
طــورا
بــافخوان
وحمـض
|
وهــي
طــورا
بغرقــد
وجــدار
|
|
عودتهــا
الــرواض
ان
عوضـتها
|
مـن
مرامـي
الرياض
جوب
البرار
|