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ســرى
بالمسـرّات
ريـح
النسـيم
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وغنَّــى
الهــزار
بصــوت
رخيـم
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تزخرفـــــت
الأرض
وازينّـــــت
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كــأن
رباهــا
جنــان
النعيـم
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وزهــــر
حــــدائقها
باســـم
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يمتّعنـــا
بشـــذاه
الشـــميم
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وهشــّت
قلــوب
جميــع
العبـاد
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وخامرهــا
الفــرح
المســتديم
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ســـروراً
بيـــوم
زهـــي
بــه
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على
التخت
يبدو
الجبين
الوسيم
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بـه
يلبـس
التـاج
خيـر
الملـو
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ك
عثمــان
رب
الفخـار
الصـميم
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بنفــس
تتــوق
إلـى
المكرمـات
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وترغــب
عــن
كـل
مرعـى
وخيـم
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فمــا
ثــم
إلا
اكتســاب
العلا
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ومجـــد
وجــود
ونفــع
عميــم
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نهنــي
بـه
التـاج
وهـو
الـذي
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يهنــى
بــه
كــل
ملــك
عظيـم
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ومــن
مثــل
عثمـان
فـي
بأسـه
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وحمتـــه
والمقـــام
الفخيــم
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سـيأتي
مـن
المجـد
بالمسـتحيل
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وينتـــج
بالمشــرفي
العقيــم
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ســما
باقتنــاء
العلـوم
علـى
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تنوّعهـــا
فـــوق
كــل
عليــم
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أب
للرعيــــــة
شـــــيبانها
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وشــبانها
والرضــيع
الفطيــم
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ومــدني
رجـال
الحجـا
والنهـى
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وطـــارد
كـــل
ســفيه
أثيــم
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شــديد
المـراس
علـى
المعتـدي
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رحيـم
علـى
المجتـدي
واليـتيم
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بكفيـــه
ضــربان
ضــرب
الطلا
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وبــالجود
يخجـل
وبـل
الرذيـم
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كريــم
السـجايا
وهـل
يلـد
ال
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كريـــم
المهــذّب
إلا
الكريــم
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مليــــك
ابـــوّته
ســـادة
ال
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ملــوك
وقسطاســها
المســتقيم
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هــم
الفــاتحون
فســيح
البلاد
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ببــاس
الأســود
ورأي
الحليــم
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هــم
الغـر
شـم
الأنـوف
الأولـى
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زكــا
تـرب
عنصـرهم
مـن
قـديم
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إلــى
صــاحب
الغـار
أحسـابهم
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فلا
مــن
ثقيــف
ولا
مــن
تميـم
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وهــذا
الخليفــة
حــامي
حمـى
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مراتبهــم
والكفيــل
الزعيــم
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أطــــال
المهيمـــن
أيـــامه
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ودمـــر
أعـــداءه
والخصـــيم
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وقــــارن
بـــالعز
أنجـــاله
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ولا
برحـوا
فـي
النعيـم
المقيم
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بعيــن
عنايــة
بــاري
الـورى
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وجـاه
الرسـول
الأميـن
الكريـم
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وهـا
يا
ابن
محبوب
من
صادق
ال
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مـــودة
والحـــب
دراً
نظيـــم
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أطــــال
جــــواركمُ
تاركـــاً
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زعامــة
أقرانــه
فــي
تريــم
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ويطلــب
مــن
فضــلك
الإذن
فـي
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زيــارة
قـبر
الحـبيب
العظيـم
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ودونــــك
للتـــاج
تـــاريخه
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بــبيت
يــروق
الـذكي
الفهيـم
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مليـــك
تــولى
ســعيد
كريــم
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حميـــد
مجيــد
أميــن
عليــم
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