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صــاح
أضــجرتني
بطــول
السـؤال
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وســماتي
تغنيـك
عـن
شـرح
حـالي
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كــان
قـدحي
مـع
الكـرام
المعلا
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ولــدى
الرمــي
لا
تطيــش
نصـالي
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ومقــامي
لــدى
الملــوك
يبـاهي
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رفعـة
البـدر
فـي
بـروج
الكمـال
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جـائل
فـي
البلاد
فـي
حلـة
العـز
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وبــــــرد
التعظيـــــم
والإجلال
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كـــم
همــام
ذي
همّــة
وقصــارى
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همّـــه
أن
يكــون
مــن
أمثــالي
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ثـم
سـاق
القضـاء
نجـبي
وحكم
ال
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حـــق
بــالحق
واجــب
الامتثــال
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فقطعـــت
المـــدى
أروح
وأغــدو
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وعلـــى
صــهوة
الجلال
اختيــالي
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جئت
للـــدكن
الخصـــيبة
لكـــن
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خائهــا
الميــم
لـي
بالاسـتبدال
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وغـدوت
النزيـل
فـي
دار
مـن
كـا
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ن
اختلاطــي
بهـم
كمثـل
اعـتزالي
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غربـة
فـي
ديـار
مـن
ليـس
جنسـي
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جنســهم
والمقــال
غيـر
المقـال
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سـمت
فيهـم
نفيـس
علمـي
فلـم
ين
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فــــق
وقرظتهــــم
بســـحر
حلال
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كـم
بـديع
نظمـت
لـم
يعرفـوا
مخ
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شـــلباً
فـــي
عقــوده
أو
لآلــي
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وبمحــض
العفــاف
صــار
كتــابي
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مســـتعاراً
وصـــافناتي
نعــالي
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ذهبــت
حكمــتي
ضــياعاً
وشمســي
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فـي
اسـتتار
وعزّتـي
فـي
ابتـذال
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فيهــم
قــد
قضــيت
تسـعة
أعـوا
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م
أذابــت
نفيــس
عمــري
ومـالي
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ثــم
دار
الزمــان
دوراً
فقـالوا
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لـــك
بشـــرى
بدولــة
الإقبــال
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دولـــة
مالـــك
الأزمــة
فيهــا
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حــاذق
صــير
فــي
نقـد
الرجـال
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فاصطبر
وانتظر
فغب
اصطبار
المرء
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فـــــوز
بمنتهـــــى
الآمــــال
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فتمثلـــت
عنـــد
ذلــك
بــالرا
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وي
لــه
ابــن
العلا
مـن
الأمثـال
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ربمــا
تكــره
النفــوس
مـن
الأم
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ر
لـــه
فرجـــة
كحــل
العقــال
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وتراخيــت
شــائماً
ذلــك
الــبر
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ق
أرجــــي
تحــــول
الأحــــوال
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وتـــوخيت
مــن
منــابعه
المــا
|
ء
وأكـــثرت
بينهـــم
تســـائلي
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فاسـتجابوا
ولـم
يزيـدوا
على
أن
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جعلــــوني
معلــــم
الأطفــــال
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وتــوالت
بــذا
التهــاني
كـأني
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نلــــت
أعلا
مراتـــب
الأقيـــال
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أيهــا
النفـس
فاصـبري
صـبر
حـر
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رابــط
الجــأش
لازورار
الليـالي
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إنمـا
نلـت
سـنة
الـدهر
فـي
مـن
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رشـــحتهم
أحســـابهم
للمعــالي
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وإذا
مـــا
الكريـــم
آنــس
ذلاً
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فـــي
بلاد
فليعـــن
بالارتحـــال
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