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جـد
بالمعتقـة
الـتي
لـم
تمـزج
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وأجـل
الـدجى
بشـعاعها
المتأجّج
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جئنـي
بهـا
صـهباء
صـب
عصـيرها
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فـي
الكـوب
آدم
قبل
يوم
المخرج
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جـرت
الإرادة
أنهـا
مـن
ذالك
ال
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عصـر
القـديم
تصـان
عـن
مـتزوج
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جريــال
احــترقت
بحـدّة
طبعهـا
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فكأنهـا
لـم
تغـل
أو
لـم
تنضـج
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جــاء
الأوان
فقـم
لفـضّ
ختامهـا
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واشـف
النفـوس
بنفحهـا
المتأرّج
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جــدّد
بهـا
الأفـراح
إن
سـميرنا
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لتنــاول
الأقــداح
ذاتُ
الهـودج
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جــام
يــدور
ومزهـر
نسـلو
بـه
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وزهـــور
ورد
غضـــّة
وبنفســـج
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جمعــت
لـدينا
اللـذّتان
بمجلـس
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صــهباء
صــافية
وربــة
دملــج
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جــن
الـدجا
فجلا
ضـياءُ
جبينهـا
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وسـنا
الطلا
جنـح
الظلام
المدلـج
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جمحـت
إليهـا
النفـس
لما
عاينت
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منهــا
مشــوب
فكاهــة
بتغنــج
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جنحــت
إلـى
وكاسـها
فـي
كفّهـا
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ورنـــت
مســلمة
بطــرف
أدعــج
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جاذبتهـا
ملـح
الهـوى
وبثثتهـا
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شــكوى
الغـرام
وحـرّه
المتوهّـج
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جزعـت
لمـا
علمـت
بـه
من
حالتي
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وتــأوّهت
لنحــول
جســم
مزعــج
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جـذبت
لتجـبر
صـدع
قلـبي
نفسها
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نحـوي
فبـتّ
بطـول
ليلتها
النجي
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جـادت
بمـا
أهوى
وجاد
الدهر
من
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لقيـا
العزيـز
بما
أروم
وأرتجي
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جـمّ
المفـاخر
صـاحب
السيف
المه
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نــد
واليـراع
وخيـر
كـل
متـوّج
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جلـت
مكـارم
نجـل
إسـماعيل
عـن
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تشــبيه
خـالص
تبرهـا
بـالبهرج
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جـالي
قتـام
المعضـلات
إذا
دهـت
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بثـواقب
الـراي
السـديد
الأبلـج
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جـز
حـول
ساحته
الفسيحة
تغن
عن
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كــل
الملـوك
وبـاب
رأفتـه
لُـجِ
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جـود
الملـوك
بمقتضـى
شـهواتهم
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ولجـوده
البـاب
الـذي
لـم
يرتج
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جهـراً
يقـال
لمـن
يحـاول
منهـم
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عليــاه
هـذا
غيـر
عشـك
فـادرج
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جـاءت
بـه
الأيـام
فـرداً
كـاملاً
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وبمثلـــه
أمّ
العلا
لــم
تنتــج
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جـاز
السـماك
ترقيـاً
وعلـى
سوى
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فلـك
اقتنـاء
المجـد
غيـر
معرج
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جــرت
بــه
مصـر
ذيـولَ
فخارهـا
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وغــدت
مــدائنها
ملاذ
الملتجـي
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جــور
النـوائب
آيـس
ممـن
غـدا
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في
سوحها
المأنوس
يذهب
أو
يجيء
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جلبـابه
زرد
الحديـد
لدى
الوغى
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والمســـتقرّ
صــهابنات
الأعــوج
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جمعـت
لنصـرته
الجيـوش
فهـم
له
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كــالأوس
فــي
غزواتـه
والخـزرج
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جـــولان
خيلهـــم
يــذكرنا
إذا
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زفــرت
لظـى
حـرب
فـوارِس
مذحـج
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جزمــت
عــوامله
رقــاب
عـدوّهم
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حـتى
ينيـب
إلـى
قـويم
المنهـج
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