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أســيدتي
لــو
تعلميــن
حكـايتي
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لأوليتنـي
مـن
جـود
عفـوك
إحسانا
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أتيتــك
لا
أبغــي
رضــاك
وإنمـا
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أتيتـك
كـي
أصـليك
بغضاً
وعدوانا
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فابـدل
ذاك
الحـبُّ
بغضـاً
بما
وعى
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فـؤاديَ
من
ذاك
الحديث
الذي
كانا
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واشـفقت
مـن
إخفـاء
امـري
فـإنه
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ســتظهره
الأيــام
إن
خفـي
الآنـا
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ومثلـك
مـن
يدري
الغرام
فان
يُبح
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محـبٌّ
بنجـواه
يَجـد
منـك
غفرانـا
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أُحـــبُّ
ولكـــن
لا
احــبُّ
أميــرة
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ولا
ذات
مجـدٍ
بـاذخ
يرفـع
الشانا
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ولكننــي
أهــوى
فتــاةً
فقيــرةً
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لهـا
خُلُـقٌ
قـد
أصبحت
فيه
أغنانا
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علقــت
بهــا
طفلاً
فلمـا
ترعرعـت
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وصــبت
بكاسـات
الغـرام
حميانـا
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ودارت
علينــا
بـالكؤوس
سـقاتها
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شـربنا
فامسـى
كلنـا
فيه
سكرانا
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وثمَّــت
إيمـانٌ
علـى
حفـظ
عهـدنا
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ننـاجي
بهـا
واللـه
يشهد
نجوانا
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فكيـف
نخـون
القلـب
والقلب
صادق
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وكيـف
تخـون
اللـه
والله
يرعانا
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فلمـا
رأت
مـا
كـان
مـن
امر
حبه
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بكـت
لرجـاءٍ
بـات
وهمـاً
وبطلانـا
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وقــد
وعــدته
أن
يكـون
نظيرهـا
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فيغـدو
لهـا
زوجـاً
ويصبح
سلطانا
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وقــد
اوعــدته
أن
تحــطَّ
مقـامه
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وتصــليَه
مـع
مـن
تعشـق
نيرانـا
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فلـم
يغرهِ
وعدٌ
وما
خاف
في
الهوى
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وعيـداً
وولـى
شـامخ
الأنـف
جذلانا
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ومــرت
شــهورٌ
وهـي
تغضـب
تـارةً
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عليــه
فلا
تـؤذي
وتحلـم
احيانـا
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ويؤلمهــا
هجــر
الحـبيب
وجـوره
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عليها
فتذري
الدمع
كالسيل
هتانا
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وتــذكر
أن
المــالكين
جــدودها
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فتشـمخ
حـتى
يصـبح
الدمع
نيرانا
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وتعلـم
أن
الغضـب
فـي
الحـبِّ
حطةٌ
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فتـأنف
حـتى
تكسـر
الطـرف
خجلانا
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إِلـى
أن
غـدا
الحبُّ
الصحيح
مملكا
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وعــزَّ
عليهــا
أن
تنغِّـص
ولهانـا
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فسـارت
إِلـى
ديـر
تصلي
إِلى
الذي
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أحبتـهُ
حبًّـا
عـزَّ
من
بعد
ما
هانا
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وآن
اوانٌ
للقـــران
فاقبـــل
ال
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عروسـان
والأقـران
تصـحب
أقرانـا
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وقـد
أقبلـت
تلـك
الأميرة
وهي
في
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ملابســها
السـودا
تمثـل
رهبانـا
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جثــت
ودعــت
للعاشــقين
وبـورك
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القـران
فلما
أصبح
العشق
سلوانا
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بكـت
ثـم
مـن
بعـد
البكاء
تبسمت
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وحــنَّ
فــؤاد
كـان
بـالحبِّ
ملآنـا
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فمــا
شــرقت
بالــدمع
إِلا
لأنهـا
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تــذكرت
الحـبَّ
الـذي
زلهـا
آنـا
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ومـــا
ابتســمت
إِلاَّ
لأن
حبيبهــا
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تبـدى
لهـا
بعـد
التجهـم
فرحانا
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