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اللَــه
أكــبر
مبلــغ
الأوطــار
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مــا
حـي
الظلام
بمشـرق
الأنـوار
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حـالت
بنـا
الحالات
أسرع
ما
نرى
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فــالقوم
بيــن
الشـك
والإنكـار
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حـدر
الزمـان
لثـامه
عـن
صـفحةٍ
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غـــرا
ومـــاس
بمعطــفٍ
خطــار
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والخلـق
قد
ثملوا
بصهباء
الولا
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طربــوا
برنــات
مــن
الأخبــار
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متلاحميــن
تــودداً
طــارت
بهـم
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وطينـــةٌ
شـــماء
كـــل
مطــار
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توحي
الثغور
إلى
الثغور
رسائلاً
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حملــت
لــذاكي
الحـب
كـل
أوار
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كـــلٌّ
يمتـــع
طرفــه
وفــؤاده
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فــي
مشــهدٍ
مــن
قــرة
وقـرار
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يـا
بـدر
يلـدز
مـا
تلوح
لناظرٍ
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إلا
علـــى
تـــمٍّ
مــن
الإبــدار
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أوضــحت
منهـاج
السـداد
بطلعـةٍ
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محمـــودةٍ
مـــن
همــةٍ
وبــدار
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يـا
مـن
قد
اجتلت
الرغائب
سهلةً
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ودم
الخلائق
بــات
غــاير
ممـار
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بـالحكم
أدركـت
المرام
ولم
يكن
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صــدعٌ
مــن
الضـراء
غيـر
جبـار
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دانـت
لـك
الجلـى
غـداة
طعنتها
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بمقـــومٍ
مــن
نبعــة
الأفكــار
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مــازلت
تتبـع
حكمـةً
فـي
حكمـةٍ
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حــتى
تطــامن
راعــب
التيــار
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وتكشــف
جلباتنــا
عــن
هــاتفٍ
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حيــا
الإلــه
عصــابة
الأحــرار
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رفعـوا
وباسـلة
الجنـود
عتادهم
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بـــأكفهم
للحـــق
كــل
منــار
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هـم
جلـة
الصـلحاء
طـار
ثنـاهم
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فــي
الخـافقين
وصـفوة
الأخيـار
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لــم
تأتنــا
أنبـاؤهم
إلا
وقـد
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نضــحت
مهـارق
مـن
عـبير
فخـار
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قد
أنجدوا
الملك
الأثيل
وزحزحوا
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عــن
متنــه
وقـراً
مـن
الأوقـار
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لمـا
تسـامى
العبـث
فيه
تنمروا
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يرمـــون
كــل
دعــارةٍ
بشــرار
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لمـا
هـوى
ركـن
العدالـة
جددوا
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نشــييده
مــن
بعــد
كـل
دمـار
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لمــا
تحجبــت
الحقيقـة
مزقـوا
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مــا
دونهــا
مــن
كلـةٍ
وسـتار
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لمــا
تكبلــت
المعـارف
قطعـوا
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أغلالهـــا
بالصـــارم
البتــار
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نتجـوا
الصـلاح
مـن
السلاح
وإنما
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بثـق
السـحابة
مـن
نتـاج
النار
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يـا
نشـوة
الألبـاب
لمـا
أبرزوا
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حريـــةً
عـــذراء
مــن
أخــدار
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لا
أتعـس
اللَـه
الأولى
صانوا
لنا
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بحياطــة
الدســتور
كــل
ذمـار
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كــم
فكــروا
قبلاً
بــه
لكنهــم
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وأبيـك
مـا
قـدروا
علـى
الأقدار
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لا
تفلــح
الــدولات
إلا
إن
جــرت
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آدابهــا
فــي
حلبــة
الأعصــار
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وتنبهـــت
عزماتهـــا
وتملصــت
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أفكارهــا
مــن
قبضــة
الأغـرار
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العــدل
يفــرغ
أمـة
فـي
قـالبٍ
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حـــتى
كــون
وحيــدة
الأوطــار
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هلا
بأشـــتات
القــرون
تأسســت
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إلا
عليـــه
عمـــارة
الأمصـــار
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ترجـو
بـأن
تخلـو
ولاة
الأمـر
من
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متعشــــقٍ
للـــدرهم
الغـــرار
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وتضــيء
للعلـم
الصـحيح
ذبالـةٌ
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يهــدي
ســناها
كـل
مقلـة
سـار
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نـاديت
قـومي
والحفيظـة
عنـدهم
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أكــرم
بهــا
مــن
حلـة
وشـعار
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لاتتنقضـوا
عهـد
التـآخي
بعـدما
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أمســى
لــدينا
محكــم
الإمـرار
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يــا
قومنـا
إنـا
خلقنـا
جيـرةً
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والحــر
لا
يرضــى
بضـيم
الجـار
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يـا
قـوم
أحمدنا
السهولة
بعدما
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جزنــا
علـى
العقبـات
والأوعـار
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ذهبــت
عمايـات
النفـوس
ونكبـت
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دون
النجــاح
مطــامع
الأشــرار
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وسـما
الرشـاد
فلم
يدع
في
مهجةٍ
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لســـخيمةٍ
أثــراً
مــن
الآثــار
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فـتربعوا
فـي
سـعدكم
مـن
نجعـةٍ
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وتَبَــوَّءوا
مــن
رغــدكم
بـديار
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ســلطانكم
عبــد
الحميـد
مظفـرٌ
|
أبــداً
بحــول
الواحـد
القهـار
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