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سـلام
يـا
أهيـف
يـا
مـورد
الخد
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يـــا
حـــالي
الأخلاق
والســجيه
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ســلام
كــالعنبر
يفــوح
والنـد
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يغشــى
شــريف
الخلقـة
السـنيّه
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ســلام
مــن
مضــني
عميـد
مكمـد
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هـــائم
بحبــك
مفتتــن
قــويّه
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شـوقه
اليـك
فـي
كـل
ساعه
أزيد
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شــوق
النفـوس
للشـربة
الهنيّـه
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لأنّ
طرفـــه
يــا
حــبيب
مســهّد
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ومـــدمعه
يســـقي
بكــل
نيّــه
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مـن
حين
فرقتك
يا
غزال
يا
اغيد
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أودّعــــك
يـــا
درّي
الثنيّـــه
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ما
زاد
دريت
أين
الطريق
ولا
أحد
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قـال
لـي
تعـال
الـبيت
هو
هنيه
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اســير
ســيره
مثلمــا
المقيّـد
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ويطلبـــك
قلــبي
وأنــت
طيــه
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هيهــات
مـا
مثلـك
مليـح
يوجـد
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وأنــت
يوســف
عصــرنا
ودحيــه
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وأنــت
ســلطان
الملاح
عــن
يـد
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وشــأنك
الأنصــاف
فــي
الرعيّـه
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لمـه
شـأظلم
وانـت
عـادل
القـد
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وســيرتك
فــي
النــاس
طـالبيه
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أنـت
الخليل
وانا
الكليم
بالحد
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مــن
ســيف
مقلـه
فـاتره
قـويه
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كـم
لك
على
العود
الرخيم
من
يد
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تنسـي
بمـن
قـد
شـاع
في
البريه
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مثــل
النـديم
الموصـلي
ومعبـد
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هــم
بالمعيــدي
حــالهم
مزلـه
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مــن
نغمتـه
قـد
ذاب
كـل
جلمـد
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خليـــك
أمــا
صــابح
العنيّــه
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فأنـــك
الجملــه
لكــل
مفــرد
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ورتبتـــك
فـــوق
الملاح
عليّــه
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والان
دلا
بــي
مــا
مليـح
تـرود
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ارفــق
بقلــبي
واحسـن
الطـويّه
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انــا
يجـارك
مـن
جفـاك
والصـد
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والهجـــر
والاعـــراض
والأذيّــه
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فــاعطف
عليــا
عطفــك
المعـود
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وارفــق
بقلــبي
وارحمـه
شـويّه
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ولا
تلومــوا
مــن
عشــق
وعربـد
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فــــأكثر
الأمــــه
محمــــديّه
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بحــق
مــن
لــك
بالجميـل
عـود
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وزينــــك
بـــالغرّه
البهيـــه
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وازكــى
صــلاتي
والســلام
سـرمد
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علــى
النـبي
والعـترة
الرضـيّه
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