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لقـد
صـدع
الحشـى
منّى
دياجي
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همـوم
مـا
لشـارقها
انصـداع
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تـــأوبه
وبـــاكره
شـــجونٌ
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عسـاكرُ
مـا
يقـي
منها
ادراع
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تطاع
بها
النفوس
وما
اشتهته
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ومـا
غيـر
النفـوس
بها
يطاع
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تسـارع
فـي
وصال
الخود
ليلى
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بـدار
فراخهـا
الكدر
السراع
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وأضــحى
للتمتـع
مـن
لماهـا
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ومحجرِهـا
فيمـا
نعـم
المتاع
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ويقنـع
ذو
الصـبابة
عن
هواه
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إذا
مـا
لاح
مـا
يحوى
القناع
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وصــنع
فــي
ترائبهـا
تـراه
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كمـا
تجلـو
سـجنجلها
الصناع
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أرتـك
أضـى
طمـت
فإذا
أضاها
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إذا
مـا
أمهـا
الظمـآن
قـاع
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تكلــف
هجرهـا
سـبعا
فأمسـى
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كـأن
القلـب
تنهشـه
السـباع
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فقلـت
زد
اثنـتين
تتـم
تسـع
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وليـس
لـه
إلـى
التسع
اتساع
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مـتى
تطلـع
ذكـاء
ذكرت
سلمى
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وليـس
لهـا
علـى
مـابي
اطلاع
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أصــمت
مســمعى
عـن
كـل
واش
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فمـا
لـي
للوشاة
بها
استماع
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أمــن
خمــر
مشعشـعة
بفيهـا
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تعــذر
نيلهــا
نفسـي
شـعاع
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أذاعــت
مريــمٌ
مكنـون
سـرى
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ولا
ســر
لهــا
عنــدي
يـذاع
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تقطــع
حبلُهــا
ولكــل
شـيء
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مـن
الـدنيا
وإن
طال
انقطاع
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وبَتّتنـــي
بهجرتهــا
ثلاثــا
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وهـل
بي
بعد
ذا
يجدي
ارتجاع
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قلَـت
طبعـي
وفـي
سوداء
قلبي
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لهـا
مـا
راق
منظرها
انطباع
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أخـافُ
جفونهـا
المرضـى
وإنّي
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علــى
الأقـران
مقـدام
شـجاع
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ولسـت
لمـا
أصـاب
أضيق
ذرعاً
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ولا
أشــكوه
مــا
لاح
الـذراع
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فكـم
أصـفيتها
ببـديع
شـعري
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فصــار
كــأنه
منـى
ابتـداع
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وأســرى
بــي
لمربعهـا
هبـل
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كــثير
اللحـم
مكتنـزٌ
رَبـاعُ
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مضـاع
صـاغر
فـي
الحـي
شخصي
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ألا
للّــه
ذا
الشـخص
المضـاع
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أضـــاعته
مريّــم
والــواتي
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حواليهــا
وذلــك
لـي
ضـياع
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أباع
بمن
يرى
في
القدر
دوني
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ومثلــي
بالاماثــل
لا
يبــاع
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سـوى
انـي
سأنشـد
عنـد
بيعي
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أضــاعوني
وأي
فـتى
اضـاعوا
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