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تهنـأ
بمجـدٍ
بـل
يهنـا
بـك
المجد
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إذا
لـم
يكـن
عـن
واحـدٍ
منكما
بد
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فإنـــكَ
للمجــد
المؤثــلِ
رأســه
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وغرتــه
والعيــن
والكـف
والزنـد
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وأنــت
الـذي
تـولي
جميـل
مـواهب
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شـمائله
مـن
غيـر
وعـدٍ
بهـا
وعـدُ
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وشمس
المعالي
والمعاني
وبدرها
ال
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منيــر
إذا
ليــل
المعـارف
مسـود
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تحيــر
ذهنــي
فـي
محامـدك
الـتي
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هـي
المجـد
لولا
مجدها
لم
يكن
مجدُ
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رأيتــك
فــي
تــاج
الأفاضــل
درةً
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وواســطة
فــي
عقـدهم
إنهـم
عقـدُ
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وجــدتك
ســيفاً
لا
أقــول
مهنــداً
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وهــل
عربـي
خـامرت
أصـله
الهنـد
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فأنشـدت
شـعر
ابـن
الحسـين
لأننـي
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مطــوق
جيــد
بالنــدا
أفلا
أشـدو
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وقـد
كـان
فـي
يوم
الخميس
علي
أن
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أقـود
خميسـاً
مـن
نظـامي
به
أحدو
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فيـا
ليـت
مـن
تـرب
فكـرء
لؤلـؤاً
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ومسـكاً
فيهـديه
إلـى
السيد
العبد
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ومـا
فـي
جلاميـد
الصـفا
جيد
لؤلؤ
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ولا
فـي
طبـاع
التربة
المسك
والند
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ومـا
كـل
مـا
تهـوى
الخواطر
ممكن
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ولكــن
هـذا
جهـد
مـن
لا
لـه
جهـدُ
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إليـك
قصـيداً
لـم
تكـن
من
كميتها
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إلــى
أحـد
إلا
إليـك
بهـا
القصـد
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أســامر
غــادرات
القريـض
لعلنـي
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أســارقها
دراً
عليــك
بــه
أغـدو
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تملكنــي
منـك
الـوداد
ولـم
يكـن
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لغيــرك
حــر
قــد
تملكــه
الـود
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فــــأثمر
إدلالاً
فمـــن
ثمراتـــه
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تـــوهم
نظمـــي
أن
أزهــاره
ورد
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جمعـت
المـالي
إذ
منعـت
سـواك
عن
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دخـول
حمـى
مـن
دون
حجرتـه
الأسـد
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وأحييــت
آثــار
الــذين
تقـدموا
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مــن
القــدما
حــتى
كـأنهم
ردوا
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فمــا
فاتنـا
شـيء
لسـبق
زمـانهم
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لأنـك
مـاء
الـورد
إن
ذهـب
الـوردُ
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