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خطايـا
الهـوى
العـذري
تنسـى
وتنسخ
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وآيــاته
فــي
اللــوح
تتلا
وتنســخ
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خليلــي
عوجــا
بـي
إلـى
حـي
فتيـة
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بنـــاديهم
داعــي
المحبــة
يصــرخ
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خمــور
الملاهــي
والغــرام
مباحــة
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لمـــن
يتصـــاب
ثـــم
أو
يتمشــيخ
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خلائق
مـن
فـي
حانهـا
البشـر
والوفا
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ومهمــا
ألـم
البـاخلون
بهـا
سـخوا
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خـذا
بـي
إلـى
الغربـي
ليلاً
وإن
علت
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هضـــابٌ
ســـنرقاها
هنـــاك
وشــمخ
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خفافــاً
نجــد
الســير
نحـو
عصـابة
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عقـود
الهـوى
فـي
شـرعهم
ليـس
تنسخ
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خيـــامهم
للعيـــن
تبــدو
قريبــة
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ودون
مـــداها
فرســـخ
ثــم
فرســخ
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خيــام
بهــا
بيــض
حســان
نــواعمٌ
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خراعيــب
فـي
غلـوى
الشـبيبة
تشـرخ
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خــرائد
لــم
أبــرح
بهــن
متيمــاً
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كـــأن
فـــؤادي
بالحجــارة
يرضــخ
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خلا
جوهـــا
عــن
شــؤم
واش
وعــاذل
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ومـــا
ثـــم
عنهــا
لائمٌ
أو
موّبــخ
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خبيري
بنا
انزل
إن
وصلنا
إلى
الحمى
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قريبــاً
عســى
روعــي
وروعـك
يفـرخ
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خصوصـاً
إذا
بـانت
لنـا
البانة
التي
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يـــبيض
بقلـــبي
حبهـــا
ويفـــرخ
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خلعــت
بحبيهــا
العـذار
ولـم
يـزل
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فــؤادي
بنـار
الشـوق
يقلـى
ويطبـخ
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خماســـية
القــد
الأســيل
يزينهــا
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أثيــث
علــى
المتنيـن
جثـل
مشـمرخ
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خـــوافيه
تبـــدو
شـــذاه
كـــأنه
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بعطــر
ثنــائي
فــي
العزيـز
مضـمخ
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خـديوينا
الراقـي
فريـداً
إلى
العلا
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وهــل
بســواه
المجـد
يعلـو
ويبـذخ
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خطيــب
العلا
توفيـق
مصـر
الـذي
بـه
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اســاس
مــتين
الملـك
يقـوى
ويرسـخ
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خيـــار
ملــوك
الأرض
نفســاً
وهمّــة
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وأفضـــلهم
رأيــاً
وأســمى
وأشــمخ
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خليفـــة
آبـــاءٍ
بعليــاء
بأســهم
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وباســـمهم
جاســوا
البلاد
ودوخــوا
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خلا
ثــوب
مجــد
ابـن
الكـرام
محمـد
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حميــد
الســجايا
كــل
ثــوب
موسـخ
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خصــال
المعــالي
فــي
ذراه
مقيمـة
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وفــي
ســفحه
نجــب
الأمــاني
تنـوخ
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خلال
يـديه
الجـود
والفتـك
في
العدى
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بهـا
عاديـات
الفقـر
والخـوف
تمسـخ
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خليــق
بكــل
الفخـر
فالمجـد
عبـده
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ونجــح
المســاعي
صـنوه
والنـدى
أخ
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خــبير
سياســي
فركــن
الهــدى
بـه
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مشـــيد
وآثـــار
الصـــلالة
تنســخ
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خفقـــنَ
رؤوس
المعتـــدين
ســـيوفه
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فطلّــت
بهــا
يــوم
الكريهـة
تشـدخ
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خبــت
شــهبهم
لمــا
تبــدى
شـهابه
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فهــم
بيــن
مــذبوح
وآخــر
يســلخ
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خنـاق
الـردى
مـا
لـم
يتوبـوا
مضيق
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عليهـم
وصـور
المـوت
في
الحرب
ينفخ
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خـذلنا
بـه
جيـش
الـردى
فهـو
بيننا
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وبيـن
الـذي
نخشـى
مـن
المـوت
برزخ
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خزائنــه
ملأى
مــن
الحمــد
والثنـا
|
إذاً
فليقــل
مـا
شـاء
فيـه
المـؤرخ
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