|
الحمــدلله
لا
يحصــى
علـى
اللـه
ثنـاه
|
ســـبحانه
عـــز
ســلطانه
تعــالى
علاه
|
|
ثــم
الصـلاة
مـع
التسـليم
عـد
العضـاه
|
علـى
النـبي
رسـول
اللـه
ختـم
أنبيـاه
|
|
والآل
والصــحب
والاتبــاع
لـه
وأوليـاه
|
وبعـد
فالنصـح
ينصـت
لـه
من
الله
هداه
|
|
يـا
صـاح
بانصـحك
قـاطع
قـاطعين
الصلاه
|
هـم
الشـياطين
والقـوم
العتـاة
العصاه
|
|
هـم
جنـد
ابليـس
والحزب
القساة
النساة
|
احـذر
تجالسـهم
أو
ترضى
الطغاة
البغاه
|
|
احــذر
تخـالطهم
أنـى
لـك
نصـيح
ونـاه
|
احـذر
تجيهـم
سـوى
للنصـح
خـذها
وصـاه
|
|
اقـرأ
كلام
اللـه
إن
كنت
من
أهل
القراه
|
واسـمع
أحـاديث
طـه
ذي
روتهـا
الـرواه
|
|
مــن
لـم
يصـل
فهـو
كـافر
ويـوم
لقـاه
|
للـــه
يلقــاه
غضــبان
عليــه
الإلــه
|
|
هـي
رأس
الإسـلام
مـن
يقطعـه
مـاله
حياه
|
مـن
لـم
يصـل
فقـط
اخطـا
طريـق
النجاه
|
|
مــن
لـم
يصـل
مـع
فرعـون
يبعـث
نـراه
|
ويكتـب
اسـمه
ببـاب
النـار
دار
الشقاه
|
|
وابليـس
صـاحبه
مـاله
منـه
ميل
أوتباه
|
يلقيـه
فـي
كـل
ورطـه
ذي
تقطـع
عـراه
|
|
هـي
ركـن
الإسـلام
يـاذا
لا
تكـن
عنه
ساه
|
وهــي
عمــوده
كــذا
جـاعن
رواة
ثقـاه
|
|
مــايترك
الفـرض
إلا
مـن
قـدالله
عمـاه
|
وســوف
ينـدم
إذا
غـر
غروجـات
الوفـاه
|
|
وزادد
فنـــوه
فــي
قــبره
وجايســالاه
|
فيـــه
نكيــر
مــع
منكروبــه
عــذباه
|
|
يصــيح
فــي
القـبر
يـاويلاه
ياحسـرتاه
|
يظــل
يبكــي
ولا
ينفعــه
شــيء
بكــاه
|
|
علاه
تـــترك
صـــلاتك
يـــاابن
آدم
علاه
|
قـم
صـل
مـادمت
عـادك
فـي
فسيح
الحياه
|
|
قـم
صـل
مـن
قبـل
موتك
والكفن
والنعاه
|
قـم
صـل
مـن
قبـل
يأتيـك
المنيـه
فجاه
|
|
قـم
صـلها
فـي
الجمـاعه
واستمع
للدعاه
|
تفضـل
علـى
المنفـرد
عشـرين
وازيد
صلاه
|
|
واســتنج
ثــم
أنونيتـك
الوضـو
للصـلاه
|
وعمــم
الـوجه
وابعـد
مانجـد
مـن
أذاه
|
|
ثـم
اغسـل
يديك
وابلغ
في
العضد
منتهاه
|
ثـم
امسـح
الـرأس
واحسن
غسل
رجلك
وراه
|
|
ومــن
عليــه
حـدث
أكـبر
لمـوجب
أتـاه
|
فليغســل
الجســم
كلــه
لا
يبقـى
قـذاه
|
|
شـعرا
وبشـراو
ينـوي
رفعـه
فـي
ابتداه
|
وطهــر
الجســم
والثـوب
الـذي
قـد
علاه
|
|
والبقعـة
اللـي
عليهـا
باتنـاجي
الإلـه
|
مــن
النجاســات
والحرمــه
والاشــتباه
|
|
واسـتر
لعورتـك
واحـذر
مـن
صلاة
العراء
|
يبطـل
صـلاته
بكشـف
السـتر
واللـه
عطاه
|
|
وصـل
فـي
الـوقت
لا
قبلـه
ولا
هـي
قفـاه
|
إلا
لنـــوم
واكـــراه
وجمـــع
وســـاه
|
|
وميــز
الفــرض
مـن
مسـنونها
باقتفـاه
|
واسـتقبل
الكعبـة
الغـرا
بحسـن
انتباه
|
|
واحــذر
تحــرك
وجــانب
مبطلات
الصــلاه
|
كالأكــل
والشــرب
والأقـوال
لـو
نحـواه
|
|
واغسـل
القلـب
سـبعا
مـن
جميـع
الدناه
|
واقبـل
علـى
اللـه
واتـرك
كل
شيء
سواه
|
|
وانـو
وكـبر
وقـم
واقـرأ
بأحسـن
قـراه
|
للفاتحـة
وافهـم
المعنـى
لما
الله
تلاه
|
|
واركـع
ورض
فـي
ركوعـك
لا
تكـن
صـاح
لاه
|
ثـم
اعتـدل
واحمـد
المـولى
على
ماحباه
|
|
واســجد
وأحســن
وسـبح
مـن
تعـالى
علاه
|
واجلـس
ورض
واسـأل
الغفـران
ربـك
عساه
|
|
وبعــده
اجلــس
مــع
حســن
الأدب
للإلـه
|
واقـرا
التحيـات
خـذها
مـن
ثقـاة
كماه
|
|
ورح
تعلــم
ولا
ترضــى
بجهــل
العمــاه
|
وبعــد
صــل
علـى
الهـادي
بأفضـل
صـلاه
|
|
ثــم
ادع
ربـك
باذكـار
روتهـا
الـرواه
|
وبعــد
ســلم
ورتبهــا
علــى
ماحكــاه
|
|
في
النظم
واسلك
سبيل
العلم
نهج
النجاه
|
عليـك
بـالعلم
واعمـل
بـه
تنـل
ماتشاه
|
|
دنيــا
وأخـرى
وتعطـي
مـن
إلهـك
رضـاه
|
فــالعلم
نــور
وأبصــار
وظــل
حيــاه
|
|
والجهـل
مـوت
عمـي
ظلمه
بذا
الله
هجاه
|
والجهــل
علــه
وليـس
إلا
التعلـم
دواه
|
|
مـا
أقبح
الجهل
ما
اشتمه
وماأوحش
رباه
|
فــرض
علـى
كـل
مسـلم
علـم
وصـف
الإلـه
|
|
وأنــه
فــرد
عــالم
قــادر
مـا
كمـاه
|
وأنـه
أرسـل
رسـول
اللـه
سـيد
الهـداه
|
|
محمــد
بــن
عبــدالله
خيــر
الــدعاه
|
ولــد
بمكــة
ووحـى
اللـه
فيهـا
أتـاه
|
|
وهجرتــه
للمــدينه
ثـم
فيهـا
الوفـاه
|
وعلــم
أحكــام
شـرع
اللـه
ممـا
نهـاه
|
|
عنــه
وممــا
أمـر
بـه
حتـم
لا
مسـاواه
|
أو
شـيء
أراده
كمثـل
أحكـام
بيعه
شراه
|
|
وعلـم
أحـوال
هـذا
القـبر
واللـي
وراه
|
أمــر
مهــول
يشـيب
الطفـل
حيـن
يـراه
|
|
كالحشـر
والنشـر
والـوزن
لمـا
قد
جناه
|
والجسـر
والحـوض
والنيـران
دار
الشقاه
|
|
مـــع
جنــان
خلقهــا
ربنــا
لأوليــاه
|
ثــم
علـى
الشـخص
فـرض
أن
يعلـم
نسـاه
|
|
وأولاده
ثـــم
جيرانــه
ومــن
قــدر
آه
|
تـارك
لشـي
مـن
أمـور
الدين
أوشى
أتاه
|
|
وهــو
محـرم
فينهـاه
كمـا
اللـه
نهـاه
|
بــالرفق
واللطـف
نصـحا
لا
يعنـف
أخـاه
|
|
واكســب
حلالا
وجــانب
جــانب
الإشــتباه
|
وزك
مالــك
فثــالث
ركـن
ركـن
الزكـاه
|
|
وصـم
لفرضـك
وحـج
الـبيت
طـف
فـي
فناه
|
ولازم
الـــــذكر
للـــــه
أن
أردت
ولاه
|
|
فالــذكر
للـه
يجلـي
عـن
فـؤادك
صـداه
|
والـذكر
للـه
يحيـى
القلـب
بل
هو
غذاه
|
|
يسـتثمر
الـذكر
مـن
يـذكر
قريـب
جنـاه
|
وللمســاجد
بيــوت
اللــه
حرمـه
وجـاه
|
|
وقــد
بنــت
للعبـادة
فاعطهـا
مقتضـاه
|
وزائر
اللـه
فـي
بيتـه
وجـب
لـه
قـراه
|
|
فعظموهــا
بفعــل
الخيـر
ممـا
ارتضـاه
|
وعطروهـــا
بكـــل
رائحـــه
مشـــتهاه
|
|
ونزهوهــا
عـن
أقـوال
الخنـا
والـدناه
|
وكـــل
مســـتقذر
أو
رائحــه
مشــتناه
|
|
وكــل
شــيء
فهــو
ينضـح
بمـافي
أنـاه
|
وعـادني
أوصـيك
ياطـالب
سـبيل
النجـاه
|
|
وراغبـا
فـي
السـلامه
كـف
هـذى
اللهـاه
|
فمــا
يكــب
الخلائق
فــي
جهنــم
سـواه
|
|
وكــل
مـن
كـان
يـؤمن
يـا
فـتى
بـالإله
|
واليـوم
الآخـر
فيصـمت
أو
يقـل
ما
يراه
|
|
خيــرا
محقــق
ويــترك
كـل
قـول
عـداه
|
هـذا
ومـن
حسـن
إسـلام
الفـتى
أن
تـراه
|
|
تــارك
لمـا
ليـس
يعنيـه
مجـانب
حمـاه
|
وصــن
بطنــك
ولا
تطلقـه
فيمـا
اشـتهاه
|
|
فـــأملي
قـــط
شـــر
مــن
وعــاء
خلاه
|
حســب
ابــن
آدم
لقيمــات
يقمـن
قـواه
|
|
وكــل
شـر
فملىـء
البطـن
أصـل
ابتـداه
|
ذا
مــن
حلال
فكيــف
الســحت
والإشـتباه
|
|
إن
الـورع
سـاس
هـذا
الدين
فاحكم
بناه
|
ياويـل
مـن
قـد
قسـا
قلبـه
كـأنه
حصاه
|
|
مــا
عـاد
يسـمع
ولا
يرجـع
لـداع
دعـاه
|
لا
هــي
بـدنيا
دنيـه
هـام
فيهـا
وتـاه
|
|
غرتــه
الأمــال
وابليسـه
وقـاده
هـواه
|
ولا
معــه
قــط
مــن
دنيــاه
إلا
عنــاه
|
|
والهــم
والغـم
والشـغله
وظلـم
الـولاه
|
إن
الهنـا
والغنـى
إلا
كبر
وطيب
الحياه
|
|
لكـــل
قلــب
ســليم
زادنــوره
صــفاه
|
طــوبى
لعبــد
مــن
الطاعـات
نحـر
ملاه
|
|
محبـة
الخيـر
وأهـل
الخيـر
قـوته
وماه
|
آيـب
وتـايب
مـن
الـذنب
الـذي
قد
جناه
|
|
خـائف
ذنـوبه
يرجـو
اللـه
يغفـر
خطـاه
|
صابروشــا
كروراضــي
بالـذي
لـه
قضـاه
|
|
مشــغول
بـالله
لـم
يشـغل
بشـيء
سـواه
|
وليــس
لــه
قصــد
أو
مطلـوب
إلا
رضـاه
|
|
ينـــوح
يبكـــي
علــى
تقصــيره
آه
آه
|
خـذا
مـن
النـاس
فـي
جـانب
عطاهم
قفاه
|
|
ولـم
يقـل
ايـش
قال
الناس
أو
فعلوا
آه
|
مراقــب
اللــه
كــأنه
للمهيمـن
يـراه
|
|
تـراه
فـي
الليـل
سـاهر
مـا
تهنى
كراه
|
خامـل
فـي
النـاس
مـن
دنياه
ما
جاكفاه
|
|
كنـز
القناعـة
متـاعه
فـاض
منهـا
وعاه
|
تجــرع
الصــبر
أيـام
البقـا
والحيـاه
|
|
فمـا
الشـجاعه
سـوى
سـاعه
وجات
البتاه
|
هــذا
هــو
العـز
ليـس
الغزمـال
وجـاه
|
|
ولا
بلبــس
الحريــر
والــذهب
والهيـاه
|
واعلــم
بأنــك
فــي
وقــت
كــثير
بلاه
|
|
قــد
قــل
دينــه
ومعروفـه
وقـل
حيـاه
|
وزاد
شـاع
التـبرج
فـي
النسـا
والجراه
|
|
ماخـافوا
اللـه
ولا
خـافوا
مقال
الشناه
|
فلا
يجـــوز
لمـــراه
مـــؤمنه
بــالإله
|
|
تظهــر
علــى
أجنــبي
قـد
تعـدى
صـباه
|
هــذا
ولـو
لـم
تكـن
ريبـه
ولا
مشـتهاه
|
|
ولا
الــبروز
مــع
عطــر
يفــوح
شــذاه
|
ولا
التــبرج
بــالزينه
كفعــل
الجفـاه
|
|
ولا
الخــروج
مــع
كشــف
لشــيء
أبــاه
|
الشـرع
فـاتبع
لشـرع
اللـه
دع
ما
عداه
|
|
وفعـل
مـا
يمنـع
التطهيـر
عنـد
الصـلاه
|
وكالنيـاحه
علـى
الميـت
وصـوت
النعـاه
|
|
كـذاك
تقصـير
وجـه
الثوب
ما
أقبح
زراء
|
مكشـــفات
كماجـــا
كاســـيات
عـــراه
|
|
أخســس
بهــا
حالــة
حــازت
لكـل
رداه
|
زينهــا
إبليــس
حسـنها
لهـم
بـاغتواه
|
|
قـد
خـاب
مـن
تـابع
العـاده
وضيع
هداه
|
إن
العوايــد
لــدين
اللــه
سـمه
وداه
|
|
يطلـب
رضـا
النـاس
منهم
ليس
يدرك
مناه
|
بـل
فـاز
بالـذم
مـن
ربـه
ومنهـم
شفاه
|
|
فهـل
تـرى
يرتضـى
ذا
الحـال
كامل
حجاه
|
وســورة
النــور
فيهــا
أي
زاجرونــاه
|
|
وعـاد
آيـه
فـي
الأحـزاب
تهـدى
العمـاه
|
لكـل
مـن
كـان
يخشـى
الله
يرجو
النجاه
|
|
إنـي
أرى
الـوقت
فيـه
أشيا
تمل
الحياه
|
مــن
التهــاون
بـأمر
اللـه
فيمـا
تلاه
|
|
وكـــل
شـــخص
عطاشـــفه
ورأســـه
ملاه
|
وتــابع
الشـح
والأهـواو
وكـثر
العكـاه
|
|
فـالظلم
ظلمـات
فـي
يـوم
القيامه
جزاه
|
وســوف
ينــدم
علــى
مـا
قـدمته
يـداه
|
|
وأهـل
الربـا
حـل
حرب
الله
لهم
مع
بلاه
|
ولعنـة
اللـه
علـى
المربـى
مـع
شاهداه
|
|
والســحق
والمحــق
والإفلاس
عاجـل
يـراه
|
والعـار
والنـار
فـي
أخـراه
عاده
وراه
|
|
ورأس
كــل
الخطايـا
حـب
دنيـا
الـدناه
|
فاسـمع
علـى
سـنة
المختـار
سيد
الهداه
|
|
خـذها
بالأجمـال
والتفصـيل
مـن
هو
يشاه
|
عليـه
باحيـا
علـوم
الـدين
يلـق
منـاه
|
|
وكــل
زارع
سيحصــد
فــي
غــد
مـاذراه
|
فمــن
ذرى
برجــاله
بــر
أو
شـوك
جـاه
|
|
ومـا
يحـوكه
فهـو
يـوم
القيـامه
كسـاه
|
فلا
يلــم
غيـر
نفسـه
مـن
وجـد
ماأسـاه
|
|
وليحمــدالله
ربــه
مــن
بفضـله
حبـاه
|
هــذا
مقــالي
ومـاقولي
كقـول
النحـاه
|
|
قـد
قـال
لـي
قـال
شـف
كـل
كلامـه
كماه
|
وقــد
تعــذرت
مــن
نظمـي
وركـة
بنـاه
|
|
فاسـتر
عيـوبي
وإن
شـئته
فقـل
ما
تشاه
|
دع
المقــالات
والقــائل
وخــذ
ماعنـاه
|
|
يــارب
يــارب
ياسـامع
دعـا
مـن
دعـاه
|
نسـألك
تختـم
لنـا
بـالخير
عند
الوفاه
|
|
وكـن
لنـا
عنـد
مـا
نحشـر
حفـاة
عـراه
|
وعافنــا
واعــف
عنـا
واعـط
كـل
رجـاه
|
|
وأنقــذ
الكــل
منــامن
مهــاوي
هـواه
|
وكـــل
ظــالم
إلهــي
كــف
عنــا
أذاه
|
|
واسـتغفر
اللـه
مـن
قـول
كـثير
افتراه
|
يبـدي
أمـورا
ويخفـى
ضـد
مـا
قـد
بداه
|
|
وصــل
ربــي
وســلم
بالمســا
والغـداه
|
علـى
رسـولك
بـي
القاسـم
شـفيع
العصاه
|
|
والآل
والصـحب
والتـابع
لهـم
في
اقتفاه
|
والحمــدلله
مبــدا
قولنــا
وانتهــاه
|