|
أشـكو
إلى
الله
الرحيم
الودود
|
مــن
وقــت
ماشـي
فيـه
منقـود
|
|
كـــل
وراشــفه
وحظــه
ينــود
|
غــايب
عــن
احساســه
ومفقـود
|
|
حـد
بالنسا
مشعف
وحمد
بالنقود
|
كــل
بهــا
قــد
صــار
مقيـود
|
|
وضــيعوا
حـق
الشـفيق
الولـود
|
والخــال
ذي
يســتاهل
الجــود
|
|
معــاد
للحــاذق
لـديهم
شـهود
|
بـل
هـو
كمـا
المجـذوم
مطـرود
|
|
يــرون
رأيــه
مسـتحق
الـردود
|
وبــــره
باطــــل
ومجحــــود
|
|
وكـم
فضـايح
لـي
عليهـا
شـهود
|
كـــثير
منهـــا
جــم
موجــود
|
|
ذو
العقل
معهم
مثل
ما
في
سنود
|
قـد
خيـر
لـك
عـادا
سدح
العود
|
|
وخلهــم
فــي
سـيرهم
والعقـود
|
واقصــد
لواحــد
خيــر
مقصـود
|
|
يـا
قلـب
لا
تطمـع
بـانه
يعـود
|
صـفوك
وقـد
شـبن
اللحـا
السود
|
|
فـاطلب
لشـي
يونسك
وسط
اللحود
|
مــن
قبــل
تمسـي
ميـت
ملحـود
|
|
واسـلك
سـبيل
الراكعين
السجود
|
ابـــذل
وراهــم
كــل
مجهــود
|
|
وارم
الخلايـق
عربهـم
والهنـود
|
جميعهــــم
والـــد
ومولـــود
|
|
إلا
بحــق
الشـرع
قـم
بالحـدود
|
مـــن
كـــل
مطلــوب
ومحمــود
|
|
وطلـق
الـدنيا
الغـرور
الشرود
|
ذي
غـــدرها
معـــروف
معهــود
|
|
دعهــا
وراظهـرك
وفـك
القيـود
|
مــن
قبــل
مـا
تجعلـك
مصـيود
|
|
فلا
لهـا
يـا
ذا
وفـا
بـالعهود
|
لا
والمشـــفع
والنـــبي
هــود
|
|
مـا
الراحة
الا
مع
أهيل
الشهود
|
ذي
فضـــلهم
فـــايض
وممــدود
|
|
أهـل
التقـى
يا
نعم
تلك
الأسود
|
يــابخت
مــن
هـو
صـار
معـدود
|
|
منهــم
ومعهـم
ذاك
حقـا
يسـود
|
فــي
ذه
وفــي
أخــراه
مسـعود
|
|
يعيـش
سـالما
مـن
جميع
الحسود
|
ومـــن
يكيــده
عــاد
مكيــود
|
|
هـذا
ولـه
مـن
بعـد
جنـه
خلود
|
وحــــوض
للمختـــار
مـــورود
|
|
عليـه
صـلى
اللـه
عـد
الرعـود
|
ومــا
ســجع
قــرى
علــى
عـود
|