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وإذا
الصــبي
مالـك
هجـرت
صـبك
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روحـــي
مـــن
المهجــه
فــداك
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غريــب
أنـا
بارضـك
أود
قربـك
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يحــــل
تبـــدى
لـــى
جفـــاك
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زعـم
تريـد
قتلـى
لكـثر
عجبـك
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أنتـــه
بحـــل
أفعـــل
منــاك
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واللـه
مـا
اسـكى
أمنعـك
وحبـك
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فـــى
مهجـــتى
لاعشـــق
ســواك
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ويــه
مــا
أحســنك
تحـت
الازار
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عاقــــد
علــــى
صـــدرك
زرار
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كــــل
الملاح
منــــك
تغــــار
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الملــك
للــه
ياصـبى
كـم
بـك
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جمـــــال
يفتــــن
مــــن
رآك
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لـو
قلـت
أنـا
للبدر
به
شبه
بك
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لقـــــال
وحمانــــا
كــــذاك
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ما
أشرقت
من
بين
البيوت
لعينى
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كالبـــدر
يــا
حــالى
امــوجن
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الا
وهـــاجت
يـــاقمر
شــجونى
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وبـــــت
هـــــايم
ممتحـــــن
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وقلــت
الا
يــا
خجلـه
الردينـى
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ورحمـــــة
الظــــبى
الأغــــن
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حيـن
يـدعى
ذا
شـبه
قـامته
بـك
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وذا
يقــــل
يحكــــى
رنــــاك
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واللــه
مــا
ذا
القــول
ميــن
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مــن
أيــن
لــك
مشــبه
منيــن
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يســـين
يـــا
ريـــم
العــدين
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يحميــك
مــن
كـل
الشـرور
ربـك
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يـــا
منيـــتى
يســـعد
مســاك
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بفضــل
ذا
القطـب
الـذى
بحنبـك
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المكــــى
الحــــامى
حمــــاك
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وأنـا
بجـار
الشـيخ
صـلاح
وجارك
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تحفـــــظ
عليّـــــا
منصــــبى
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تــداركه
لــى
باللقــا
تـدارك
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قبـــل
اهتكـــه
يـــا
متعــبى
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ولا
تقـول
لـى
حيـن
أقيـم
بدارك
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يوشـــى
بنـــا
حاســـد
غـــبى
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فالليـل
إذا
مـازرت
فيـه
محبـك
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يخفـــى
علــى
الحاســد
خطــاك
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أليــس
مــا
الليــل
يـا
حـبيب
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قــالوا
نهــار
الفــتى
الأديـب
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فـــدوس
يـــا
حــالى
امشــنيب
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انـف
الخطـر
وانعـم
علـى
محبـك
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بالوصـــل
صــان
اللــه
بهــاك
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وحســى
اللــه
يـا
رشـا
وحسـبك
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كفــــانى
اللــــه
أو
كفـــاك
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