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يـا
رعى
الله
أيام
منها
الدهر
غار
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والليـــالي
تقضــّت
لنــا
أعــراس
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بالغنـا
والغـواني
وبالكاس
المدار
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فـــي
البكـــر
والأصـــائل
والأغلاس
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والزمـان
لي
مساعد
على
جلب
المسار
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واغتنــــام
الهنـــا
والتنفّـــاس
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هكـذا
كـل
هـذرى
مـع
خلـع
العـذار
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لا
يبـــالي
بمــا
قــالوا
النــاس
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يـا
فـؤادي
تصـبر
وهيم
واحرق
بنار
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واضــرب
أخمــاس
فـي
مضـرب
أسـداس
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كـم
نصـحتك
وكـم
قلت
لك
حف
القطار
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قبلمــا
يحنــب
الـراس
فـي
الفـاس
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وتحملــت
مـا
لا
يطـاق
حملـه
فجـار
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وحملتـــه
علـــى
غيـــر
مقيـــاس
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وعشــقت
البنيّـات
الأبكـار
الصـغار
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ســــالبات
الخـــواطر
والإحســـاس
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سـامح
اللـه
مـن
بـالتجني
والنفار
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والتجــــافي
وكــــثر
التحمـــاس
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شـل
عقلـي
وهـو
راس
مـالي
والضمار
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وطــواه
فــي
يــديه
طــي
قرطــاس
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مـن
لوجـدي
وشـوقي
واشـجاني
أثـار
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طـــبي
نعمـــان
مســـكيّ
الأنفــاس
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مـن
شهر
من
لحاظه
لقلبي
ذي
الفقار
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ورشـــق
نبـــل
مــن
طــرف
نعــاس
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نـور
الاصباح
بدر
الدجى
شمس
النهار
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ســاجيَ
الطــرف
مــن
كــل
نــبراس
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من
جمع
في
الخدود
النديه
ماء
ونار
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وعليهـــا
مـــن
العيـــن
حـــراس
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وابتسـم
عـن
لآلـي
عليها
الخمر
دار
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يســكرك
مــن
لمــاه
لا
مـن
الكـاس
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منـه
كـل
الظبـا
إن
ثنى
جيده
تغار
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ولـــه
الغصـــن
يســجد
إذا
مــاس
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دبّ
فينـا
هـواه
يـا
رفق
دب
العقار
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وهــو
مــا
لان
لــي
قلبــه
القـاس
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يـا
حـبيب
راقـب
الله
وخل
الاعتذار
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مـا
عليـك
عـار
فـي
الوصـل
أو
باس
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فـإن
تسـاعد
محبـك
بوصـلك
فالبدار
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وان
تمنعــت
فــاقطع
لــه
اليــاس
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وأنــت
داري
بـأني
قليـل
الاصـطبار
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ليــس
لــي
صــبر
أيــوب
واليــاس
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وأنـت
أنـت
المقلـد
بظلمي
والضرار
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والغريــم
أنـت
يـوم
يحشـر
النـاس
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والصـلاه
والسلام
ما
سجع
طير
الهزار
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تبلــــغ
الطهـــر
والآل
الاكيـــاس
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