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فــوتين
فــاتنتي
أَنّـى
تفوتينـا
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هـل
حـلَّ
فـوتي
بأَي
الشرع
تفتينا
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مـع
يُمـن
يُمنى
لَقَد
سارَت
ركائبكم
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والـروح
تنسـاب
عن
يُمنى
موالينا
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غـــادرتِ
جســـميَ
لا
روحٌ
تروحــهُ
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والقـب
سـؤليَ
سـارٍ
حيـث
تسـرينا
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ســافرتِ
منغيــر
توديـعٍ
يـذكرنا
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حسـن
الـوداد
وألطـاف
المحبينـا
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وقـد
أتينـا
لنادي
اللطف
في
شغفٍ
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كيمــا
نفــوزَ
بتوديــعٍ
يُسـلينا
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ولـم
نجد
في
الحمى
عيناً
ولا
أَثرا
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عـدنا
حيـارى
وقـد
خابَت
مساعينا
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هـل
سـار
شـخصٌ
بفـابورين
في
زَمَنٍ
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معـاً
وكـلٌّ
يقـول
الشـخص
ثاوينـا
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تنـازع
القَلـب
والفابور
فيهِ
وقد
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توافقـا
عـن
رضـاهُ
فـي
تنائينـا
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تضـارعا
بـاللظى
والسـير
عن
كظمٍ
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تغــايرا
رونقــاً
شـكلاً
وتفنينـا
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فــذا
أسـير
هـواءِ
بالمسـير
وذا
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ملقىً
باسر
هوىً
يلقى
السُرى
دينا
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لكـــن
لــذاك
دواليــبٌ
تقلبــهُ
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وَالقَلــب
دولابـهُ
ألطـاف
فوتينـا
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قـد
أظلم
القطر
مذ
غابت
زواهركم
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والأنـس
قـد
زال
طـراً
من
أراضينا
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لمّـا
نحـوتم
إلـى
مينـا
طرابلـسٍ
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قد
صاح
دمعي
سُقيت
الغيثَ
يا
مينا
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وحيـن
غبتـم
وقد
حان
الفراق
لنا
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حـنّ
الجمـاد
وقـد
نـاحت
نواحينا
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ومـا
الملاهـي
إلـى
قَلـبي
بلاهيـةٍ
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ولـو
أتـاني
لُهـى
الدنيا
ملايينا
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أمسـيتُ
فـي
وحشـتي
كالورق
نائحةً
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وَالـدمع
يُهمـى
عُباباً
من
أماقينا
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قـد
قـلَّ
صبري
وصبر
الهجر
حَلَّ
فمي
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وفـي
التناءي
مذاق
الموت
يسقينا
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مذ
بنتِ
يا
منيتي
مني
المُنى
شسعت
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واعتضـتُ
نيل
المنايا
عن
أمانينا
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مـن
لـي
بريح
الصبا
كيما
أكلفها
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فـي
عـرف
خـدٍّ
حـوى
ورداً
ونسرينا
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قـد
راحت
الراح
والأرواح
حين
نأَت
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مـن
أخجلـت
راحُهـا
ريحـاً
رياحـا
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يـا
سـائلي
عـن
سـُلُوٍّ
سل
بهِ
كلفاً
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فكيـف
نسـلو
ونـار
الهجر
تسلينا
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عِــدي
بعَـودٍ
واحيـي
عـود
يابسـةٍ
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لأن
بعـد
البعـاد
العَـودُ
يحيينـا
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رجــاءُ
هائمــةٍ
يتلـو
نـدا
لهـفٍ
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فــوتين
فـاتنتي
أَنّـى
تفويتنـا
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