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يـا
جمـال
مـن
أهـوى
يـا
غيب
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أثنــي
ذا
الحجـاب
صـلْ
عبـدَكْ
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متعنـــي
بمــا
أروى
لا
عيــب
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صــلني
إن
تشــأ
أكــن
عبـدَكْ
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نـــور
الـــوجه
لــي
ظــاهر
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وهـــــو
للــــورى
بــــاهر
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قلبهــم
لــه
مــأوى
لا
ريــب
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يهنــي
عنــه
لا
تخــف
بعــدَكْ
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تحـت
ذا
القناع
محبوب
يا
ليت
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حــبي
لــو
يكــون
لـي
يظهـر
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إننـي
أنـا
المحسـوب
كـالميت
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لــبي
حســنه
البهــي
أبهــر
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واحـــد
مـــا
لـــه
ثـــاني
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واحـــــد
لــــه
الفــــاني
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لا
تـرى
سـواه
مطلـوب
والـبيت
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قلــبي
طــف
بــه
تنـل
سـعدك
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قم
بنا
إلى
الندمان
في
الحان
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يـا
صـاح
نـدرك
الصفا
بالراح
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واسـتمع
مـن
العيـدان
ألحـان
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أقـداح
لـي
أتـت
بهـا
الأفراح
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طـــاب
لـــي
بهـــا
كاســـي
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لان
قلبُهــــــا
القاســــــي
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والعــذول
فـي
حرمـان
أفنـان
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أفــراح
منــه
فـاحترز
جهـدك
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طلعـة
المليـح
الزيـن
يختـال
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إنــي
مطلــع
لــذاك
النــور
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مـن
بـه
قريـر
العيـن
بالحال
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يغنــي
حــاله
عــن
الطنبـور
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قـــــد
رفعــــت
أســــتاري
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واجتليـــــــت
أنــــــواري
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أيـن
مـن
يرانـي
أيـن
قد
زال
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عنــي
يــا
رشـا
الحمـى
صـدك
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حولـوا
حجـاب
الغيـر
عـن
عين
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ذاتــي
واكشـفوا
عـن
الأسـتار
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إخـوتي
وجـدوا
السـير
لا
بيـن
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يــاتي
فــي
مشعشــع
الأنـوار
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فــــالحبيب
قــــد
وافــــى
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والبغيــــض
قــــد
صــــافى
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والـذي
يريـد
الخيـر
بـالمين
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عـــاتي
قصــده
نفــى
قصــدك
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كلهـــم
هــم
الأفعــال
لا
ذات
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عنـدي
غيـر
عيـن
تلـك
الـذات
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فاعرضـوا
عـن
الجهـال
أمـوات
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تبــدي
وهــم
مـا
بـه
تقتـات
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وافهمـــــــوا
لأقــــــوالي
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واســــــلكوا
بــــــأحوالي
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والعليـم
يـدري
الحال
ما
فات
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قصــدي
أن
يهيــج
بــي
وجـدك
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والصـــلاة
والســـلام
نــوران
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منــي
دائمــاً
علــي
الهـادي
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مــن
حبــاه
بـالإكرام
رحمـان
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فنــــي
مــــدحه
بإنشـــادي
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عبـــــد
الغنــــي
شــــامي
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قـــــدره
بـــــه
ســـــامي
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كاســـه
مـــن
التســنيم
ملآن
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يــدني
منــك
يـا
أخـي
رشـدك
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