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بصــائرنا
فــي
القضـا
خامـده
|
وكـــــل
قضــــيته
واحــــده
|
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ففيــم
التصــور
تحــت
العمـى
|
وفيـــم
الــدعاوي
ولا
شــاهده
|
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رأيـــت
التقصـــي
بآرائنـــا
|
بحتـــم
القضــا
فضــلة
زائده
|
|
ولـــو
فـــاز
رأي
بموهوبـــة
|
فـــأم
القضــاء
لــه
والــده
|
|
وكــل
الوجــود
ببحـر
الشـئون
|
حقيقتــــه
نقطــــة
راكـــده
|
|
وخبطــك
بــالرأي
تحـت
القضـا
|
ذهــــول
وعجرفــــة
بـــادره
|
|
ومــا
وهــب
اللّــه
مـن
مكنـة
|
فتلــــك
محركــــة
جامــــده
|
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وإن
كشـــف
الـــرأي
محجوبــة
|
فتلـــك
برفــق
القضــا
وارده
|
|
فســلم
إلــى
اللّــه
أفعــاله
|
لتجــري
الأمـور
علـى
القاعـده
|
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فمــا
لــك
حــول
يـرد
القضـا
|
وذائدة
العجــــز
كالقـــائده
|
|
ومـا
لـك
فـي
الأمـر
مـن
شـركة
|
تـــــأدب
ولا
ذرة
واحـــــده
|
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تلاقــي
القضــاء
بغيـر
الرضـا
|
وأنـــت
علــى
قــدرة
نافــده
|
|
إذا
دبــر
اللّــه
أمــراً
جـرى
|
برغـــم
تــدابيرنا
الفاســده
|
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أتنهـــض
رأيــك
ضــد
القضــا
|
فــأوهن
بهــا
نهضــة
قاعــده
|
|
وفكـــرك
فـــي
قـــدر
فــائت
|
وفـــي
مقبــل
رتبــة
واحــده
|
|
وأفكارنـــــا
وسياســـــاتنا
|
وتــــدبيرنا
شـــرر
خامـــده
|
|
وجــد
النفــوس
وكــل
القــوى
|
إلــى
نســبة
فوقهــا
عــائده
|
|
وإن
كــان
لا
بــد
مــن
فكــرة
|
ففــي
هــذه
البرهـة
البـائده
|
|
وفـــي
النشــأتين
وعقباهمــا
|
وصـــادرة
المــوت
والــوارده
|
|
أمـا
ترعـوي
فـي
مراعي
الغرور
|
وصـــائدة
المنتهـــى
راصــده
|
|
تعيـــش
بهــا
بيــن
مفقــودة
|
وراقبــــة
حتفهـــا
فاقـــده
|
|
نهـــش
غـــل
زخـــرف
منقـــض
|
وتعــرض
عــن
دارنــا
الآبــده
|
|
وتنســى
المنايـا
وقـد
أنفـذت
|
مقاتلنـــا
الأســهم
الصــادره
|
|
نـــروح
ونغــدو
علــى
مــأمن
|
وآســــاد
آجالنـــا
حـــارده
|
|
ننــــازع
أيامنـــا
صـــفوها
|
ومــا
للصــفاء
بهــا
واجــده
|
|
ونــأمن
فيهــا
هجــوم
الـردى
|
وليــــس
لهجمتــــه
جاحـــده
|
|
وتنعـــي
الجنــائز
أرواحنــا
|
ودمعــــة
أعيننـــا
جامـــده
|
|
تـثير
السـوافي
علينـا
الـثرى
|
وذاك
الســفا
الأعظـم
الهامـده
|
|
نـوى
الأصـل
والفـرع
فـي
بطنها
|
وقـــد
بقيــت
نوبــة
واحــده
|
|
وهيهــات
قــد
بــادرت
زرعهـا
|
ومـــدت
مناجلهـــا
الحاصــده
|
|
علام
التهـــافت
فـــي
حـــائل
|
وقــد
علــق
القيــد
بالآبــده
|
|
ســيعلو
البلاء
إلــى
الفرقـدي
|
ن
ينتهــب
الصــحبة
الخالــده
|
|
ويصــدع
فــي
قبـة
الشـمس
مـن
|
غــــوائله
صــــدعة
صـــاعده
|
|
وتبلـــى
الجديــدين
مقــدورة
|
مــن
الخطــب
بارقــة
راعــده
|
|
ويـــدهى
الوديـــع
بنعمــائه
|
زوال
معيشـــــته
الراعــــده
|
|
كــأن
الــردى
حاســد
للمعــا
|
ش
وحــتى
علــى
شـظف
الهابـده
|
|
إلــى
أيـن
يسـمو
علـو
البنـا
|
وقـــرح
المعـــول
بالقاعــده
|
|
ترفــق
بطينــة
هــذا
البنــا
|
فهاتيــك
أجســامنا
الهامــده
|
|
نشـــاهد
تفـــتيت
أجســـامنا
|
وليــــس
لأرواحنـــا
شـــاهده
|
|
ولكنهــا
حبســت
فــي
العمــى
|
وســـوف
تعــود
لهــا
عــائده
|
|
مــتى
ينـزع
المـوت
عـن
فتكـه
|
فتبقــى
لمولودهــا
الوالــده
|
|
يحـــز
الحيــاة
شــباً
قــارظ
|
ولــم
تنتبــه
هــذه
الراقـده
|
|
وإن
حيــــاة
إلـــى
منتهـــى
|
خيــــال
يحـــول
بلا
فـــائده
|
|
حظيـــرة
مفتقـــد
مــا
بهــا
|
هنــاء
ســوى
صــرخة
الفاقـده
|
|
وتفتــــأ
تعقــــد
آمالنـــا
|
وينجــل
مــا
تعقــد
العاقـده
|
|
يصــال
علــى
صــيحة
المعتـدي
|
فتنشــب
بيـن
اللهـا
الـزارده
|
|
يلــــم
الســـوابغ
ســـرادها
|
فتفرجهــا
الطعنــة
الســارده
|
|
ويفــري
المدجــج
حــد
الـردى
|
فمــا
تــدفع
الشـكة
الهامـده
|
|
ومــا
يحفــز
الـدهر
إلا
البلا
|
وإن
أســـجحت
يـــده
الآبـــده
|
|
ممـــض
فمـــا
تنقضــي
ليلــة
|
ولــم
تكــن
الليلـة
العامـده
|
|
ليـــاليه
كالســـفن
ميـــادة
|
ببلــــواه
غامــــدة
آمـــده
|
|
دهــت
ذات
روقيــن
مــن
خطبـة
|
بمــــوئد
مقصــــدة
قاصـــده
|
|
فكـــرت
ولا
رأي
فـــي
ردهـــا
|
ولا
فاتهـــا
مهــرب
الشــارده
|
|
أتــــت
لا
يؤبســــها
قـــارص
|
ولا
تنقـــي
الأبــرج
المــارده
|
|
تـــؤز
الصـــياخيد
أهوالهــا
|
فمــا
بـال
أكبادنـا
الكابـده
|
|
فمـا
اسـتنزفت
مـن
دماء
القلو
|
ب
كما
استنزفت
من
أسى
الواجده
|
|
ولا
امترســـت
لســماء
العلــو
|
م
حـــتى
تكـــدكت
الماهـــده
|
|
لهــا
أجهشـت
بالبكـاء
السـما
|
تنـــاوح
أجفاننــا
الســاهده
|
|
رزيئة
دهـــر
فجعنـــا
بهـــا
|
لأفظــــع
مفجعــــة
حاشــــده
|
|
نحــت
مســتقر
النـدى
والهـدى
|
فــــدكتهما
دكــــة
واحـــده
|
|
فهـل
صـادف
الـدهر
ثـاراً
بهـا
|
وداوى
بهـــا
علـــة
عامـــده
|
|
تحزمـــت
المجــد
فــي
غــارة
|
شــناخيب
رضــوى
بهــا
مـائده
|
|
أغــارت
شــعوب
علــى
خيرنــا
|
وكـــانت
لميقاتهـــا
راصــده
|
|
رزئنــا
المــرزء
طــود
العلا
|
أبــا
صــالح
عيلــم
الـوارده
|
|
رزئنـــاه
غيثــاً
يعــم
الملا
|
وقــد
أعـدمت
غيثهـا
الـرائده
|
|
تخطـــف
أحمــد
ريــب
الــردى
|
فيــا
حــرب
الحمـد
والحامـده
|
|
حمــدنا
الزمــان
بــه
برهــة
|
فصــالت
عليهــا
يــد
صــائده
|
|
فمــا
أسـوأ
العيـش
مـن
بعـده
|
ومــا
أصــغر
النـوب
الوافـده
|
|
فيـــا
لحيــاة
قضــت
نحبهــا
|
وكــل
حيــاة
أمريــء
نافــده
|
|
حيــاة
القلــوب
بتلـك
الحيـا
|
ة
واصــلاح
أنفســنا
الفاســده
|
|
بضــن
بهــا
الكـون
فـي
حجـره
|
فصـــارت
إلــى
جــدث
خامــده
|
|
ويــوم
الضــنين
كيــوم
المـه
|
يـن
وفـي
المنتهى
تقف
القاصده
|
|
ومــا
بيـد
أحمـد
بيـد
امريـء
|
ولكــن
نفــوس
الــورى
بـائده
|
|
لقـــد
كــان
يرجــح
ميزانــه
|
وذات
الكمـــال
بـــه
شــاهده
|
|
يجلــــي
بابلـــج
ذي
فرجـــة
|
مــن
العلــم
مشــكلة
عانــده
|
|
شـــــداد
العـــــوارض
آراؤه
|
إذا
اعـــتزمت
خطـــة
ناهــده
|
|
فيــا
للمعــارف
حســن
العـزا
|
لقــد
أصــبحت
ســوقها
راكـده
|
|
لقـــد
كـــان
نيــر
أفلاكهــا
|
فخـــر
إلـــى
حفــرة
رامــده
|
|
فواحربـــا
لصـــروف
القضـــا
|
لقـــد
طعنــت
طعنــة
عامــده
|
|
ومــا
مــن
صـروف
القضـا
وائل
|
ومــا
لصــروف
القضــا
كـارده
|
|
ولا
بــد
مــن
نهـش
صـل
الـردى
|
ومــا
للرقــى
عنــده
فــائده
|
|
وكيــــف
نضــــن
بأرواحنـــا
|
وتلـــك
غنيمتـــه
البـــارده
|
|
فيــا
لهــف
نفسـي
علـى
أحمـد
|
إذا
نفعـــت
لهفــة
الفاقــدة
|
|
ســلوت
الســلو
ورشــد
الأســى
|
وأحمــــد
أنفاســـه
خامـــدة
|
|
لــد
زهــدت
نفسـه
فـي
الوجـو
|
د
فهــل
للحيــاة
معـاً
زاهـدة
|
|
تعبـــد
حـــتى
أتــاه
اليــق
|
يـن
فـذابت
لـه
الأنفس
العابده
|
|
تحـــالفت
الأرض
فـــي
عمـــره
|
وآرابـــه
الزهـــر
الســاجده
|
|
فليــــت
حليفــــة
آرابــــه
|
وقتــه
بلـى
التربـة
الرامـده
|
|
لقــد
دهــش
الكـون
لمـا
ثـوى
|
فمــا
وجــدت
رشـدها
الراشـده
|
|
وزلـــــزت
الأرض
زلزالهـــــا
|
وضـــاقت
بأجزائهـــا
هامــده
|
|
ومـــا
ضــاقت
الأرض
مــن
رزئه
|
كمــا
ضــاقت
المنـن
الخالـده
|
|
طــوى
العــالمين
إلــى
ذاتـه
|
بطارفـــة
المجــد
والتالــده
|