|
هــذا
الـذي
ضـمن
القـرآن
مـدحته
|
هــذا
الـذي
ترهـب
الأسـاد
صـولته
|
|
هـذا
الـذي
تحسـد
الامطـار
راحتـه
|
هـذا
الـذي
تعـرف
البطحـاء
وطأته
|
|
والــبيت
يعرفــه
والحـل
والحـرم
|
|
هـذا
ابن
من
زينوا
الدنيا
بفخرهم
|
وأوضـحوا
ديننـا
فـي
صـبح
علمهـم
|
|
وأخصـبوا
عيشـنا
فـي
قطـر
جـودهم
|
هـذا
ابـن
خيـر
عبـاد
اللـه
كلهم
|
|
هـذا
النقـي
النقـي
الطاهر
العلم
|
|
هـذا
الذي
لم
يخب
في
الدهر
قاصده
|
هـذا
الـذي
لـم
يكـذب
قـط
حامـده
|
|
هـذا
الذي
ما
ونى
في
الحرب
ساعده
|
هـذا
الـذي
أحمـد
المختـار
والده
|
|
وابـن
الوصـي
الذي
في
سيفه
النقم
|
|
هـذا
الـذي
ليس
يحكي
البحر
نائله
|
هـذا
الـذي
كـرم
البـاري
فضـائله
|
|
وشــابه
الزهــر
الزاهـي
شـمائله
|
هـذا
ابـن
فاطمـة
ان
كنـت
جـافله
|
|
بجــده
أنبيـاء
اللـه
قـد
ختمـوا
|
|
هـذا
الـذي
حـل
منه
في
العدى
كمد
|
هـذا
الـذي
للمـوالي
دائمـا
عضـد
|
|
هـذا
الـذي
مـا
حـوى
إقـدامه
أسد
|
هـذا
ابـن
حيـدرة
الكـرار
لا
أحـد
|
|
إلا
بهــذا
عليــه
الفضـل
والكـرم
|
|
هـذا
الـذي
إن
يصـل
فـالله
عاضده
|
هـذا
الـذي
ان
يقـل
فالذكر
شاهده
|
|
هــذا
الـذي
جحـد
الرحمـن
جاحـده
|
هــذا
علــي
أميــن
اللـه
والـده
|
|
أمســت
بنـور
هـداه
تهتـدي
الأمـم
|
|
هــذا
الــذي
نــثرت
درا
براعتـه
|
وحيّـــرت
كــل
ذي
عقــل
براعتــه
|
|
ومــن
قلاه
فلــم
تربــح
بضــاعته
|
هـذا
الإمـام
الـذي
ترجـى
شـفاعته
|
|
يـوم
المعـاد
إذا
ما
النار
تضطرم
|
|
هــذا
الـذي
ذاب
منـه
قلـب
حسـده
|
هـذا
الـذي
فاض
بحر
الجود
من
يده
|
|
هـذا
الـذي
قـط
لـم
يكـذب
بموعده
|
مــا
قــال
لا
قــط
إلا
فـي
تشـهده
|
|
لــولا
التشــهد
كــانت
لاءه
نعــم
|
|
هـذا
الـذي
منه
سيف
الحق
قد
شحذا
|
هـذا
الـذي
مـن
رجاه
لم
يصبه
أذى
|
|
ومـن
يعـاديه
في
النيران
قد
نبذا
|
مـن
يعـرف
اللـه
يعـرف
أوليـة
ذا
|
|
فالـدين
مـن
بيـت
هـذا
ناله
الأمم
|
|
كالبـدر
يزهـر
والظلما
قد
اعتكرت
|
كالغصـن
يهـتز
إذ
ربح
الثنا
خطرت
|
|
كـالطود
يثبـت
الأرمـاح
قـد
شـجرت
|
ينمـى
إلـى
ذروة
العـز
التي
قصرت
|
|
عــن
نيلهـا
عـرب
الإسـلام
والعجـم
|
|
هـذا
ابـن
من
قط
لم
تحجب
فضائلها
|
مـن
ذا
يفاخرهـا
مـن
ذا
يسـاجلها
|
|
هـذا
ابـن
من
عم
كل
الناس
نائلها
|
إذا
رأتــه
قريــش
قــال
قائلهـا
|
|
إلــى
مكـارم
هـذا
ينتهـي
الكـرم
|
|
هـذا
الـذي
فـاقت
الأقمـار
طلعتـه
|
هـذا
الـذي
ألسـن
التنزيـل
تنعته
|
|
مـن
ليـس
ترقـا
لخـوف
الله
دمعته
|
مشــتقة
مــن
رسـول
اللـه
نبعتـه
|
|
طــابت
عناصــره
والخيـم
والشـيم
|
|
هـذا
الـذي
فـاق
قسـا
فـي
فصاحته
|
وفــاق
حــاتم
طــي
فــي
سـماحته
|
|
فهـل
درى
الـبيت
مـن
بمشي
بساحته
|
يكـــاد
يمســكه
عرفــان
راحتــه
|
|
ركـن
الحطيـم
إذا
مـا
جـاء
يستلم
|
|
تـاهت
عقـول
الـورى
في
حسن
سيرته
|
حــارت
عيــونهم
فـي
حسـن
صـورته
|
|
إذا
أتــى
نحـوه
العـافي
بحـاجته
|
يغضــي
حيـاء
ويغضـى
مـن
مهـابته
|
|
فلا
يكلــــم
إلا
حيــــن
يبتســـم
|
|
فـي
قـوله
قـول
كـل
النـاس
متفـق
|
وفــي
محيــاه
بـدر
الحسـن
متسـق
|
|
وفــي
شـذاه
أريـج
المسـك
منتشـق
|
فــي
كفــه
خيــزران
ريحــه
عبـق
|
|
مــن
كــف
أروع
فـي
عرينتـه
شـمم
|
|
برغـــم
مبغضــه
الرحمــن
كمّلــه
|
وبالبهـــاء
وبـــالأنوار
جمّلـــه
|
|
وللعلــــوم
اللـــدنيات
حملـــه
|
مــن
جـده
دان
فضـل
الأنبيـاء
لـه
|
|
وفضــل
أمتــه
دانــت
لــه
الأمـم
|
|
هـذا
الـذي
قـدره
فوق
السماك
سما
|
هـذا
الـذي
لم
يزل
بالمجد
مبتسما
|
|
يمينـه
لـم
تـزل
تهمـي
لنـا
كرما
|
كلتــا
يــديه
غيـاث
عـم
نفعهمـا
|
|
يســتو
كفــان
فلا
يعروهمــا
عـدم
|
|
مفخــم
كــل
مـن
فـي
الأرض
شـاكره
|
مكـــرم
خــالق
الأكــوان
ناصــره
|
|
مهــذب
مــا
لــه
مثــل
ينــاظره
|
ســهل
الخليقــة
لا
تخشـى
بـوادره
|
|
يزينـه
الخصـلتان
الخلـق
والكـرم
|
|
مـن
معشر
عن
عظيم
الجرم
قد
صفحوا
|
حسـاده
قـط
مـا
فـازوا
ولا
ربحـوا
|
|
أتبـاعه
فـي
بحار
الجود
قد
سبحوا
|
حمــال
أثقـال
أقـوام
إذا
قـدحوا
|
|
حلــو
الشـمائل
تحلـو
عنـده
نعـم
|
|
قلــوب
أهــل
الـولا
طـرا
أسـيرته
|
وكيــف
لا
وهـو
قـد
طـابت
سـريرته
|
|
وشــابهت
ســيرة
المختـار
سـيرته
|
لا
يخلــف
الوعــد
مـأمون
نقيبتـه
|
|
رحــب
الفنـاء
أريـب
حيـن
يعـتزم
|
|
لـه
الفضـائل
في
الدارين
قد
جمعت
|
ومـن
محيـاه
شـمس
الـدين
قد
طلعت
|
|
ورايـة
الجـود
فـي
كفيـه
قد
رفعت
|
عــم
البريــة
بالإحسـان
فانقشـعت
|
|
عنهــا
القتــارة
والإملاق
والعـدم
|
|
فـي
حسـن
بـاطنه
مـع
حسـن
ظـاهره
|
قـد
فـاق
فهـو
فريـد
فـي
مفـاخره
|
|
ففضــله
ليــس
ذو
علــم
بحاصــره
|
فليــس
قولــك
مــن
هـذا
بضـائره
|
|
العـرب
تعـرف
مـن
أنكـرت
والعجـم
|
|
مبجــل
مــن
أنــاس
عــز
جــارهم
|
قـوم
سـمت
فـوق
هـام
النجم
دارهم
|
|
وشــاع
فــي
سـاير
الآفـاق
مـدحهم
|
مــن
معشــر
حبهــم
ديـن
وبغضـهم
|
|
كفـــر
وقربهــم
منجــى
ومعتصــم
|
|
الســيف
والرمــح
والأقلام
تخــدمه
|
واللـه
مـن
كيـد
مـن
عاداه
يعصمه
|
|
قـد
سـر
قلـب
الصفا
والحجر
مقدمه
|
لـو
يعلـم
البيت
من
قد
جاء
يلثمه
|
|
لظـل
يلثـم
منـه
مـا
وطـى
القـدم
|
|
مـن
معشـر
أوضـح
البـاري
محتجهـم
|
وأحكـم
اللـه
فـي
القـرآن
حجتهـم
|
|
ولـم
يـزل
قارنـا
بالصـدق
لهجتهم
|
ان
عـد
أهـل
التقـى
كانوا
أئمتهم
|
|
أو
قيـل
مـن
خير
كل
الخلق
قيل
هم
|
|
المؤمنــون
جميعــا
تحـت
رايتهـم
|
قـد
أبصـروا
بصـباح
مـن
هـدايتهم
|
|
وقـد
رعـوا
فـي
ريـاض
من
رعابتهم
|
لا
يســتطيع
جــواد
بعــد
غـايتهم
|
|
ولا
يـــدانيهم
قــوم
وإن
كرمــوا
|
|
أفعـالهم
بـالتقى
والرشد
قد
وسمت
|
همـاتهم
قـد
علـت
فوق
السها
وسمت
|
|
بيـن
النـدى
والـوغى
أيامهم
قسمت
|
هـم
الغيـوث
إذا
مـا
أزمـة
أزمـت
|
|
والأسـد
أسـد
الشـرى
والبأس
محتدم
|
|
لا
يثمــر
الرشــد
إلا
غصـن
هـديهم
|
لا
يطلــع
الســعد
إلا
أفـق
مـدحهم
|
|
لا
يذبــح
الفقــر
الا
سـيف
بـذلهم
|
لا
ينقـص
العسـر
بسـطا
مـن
أكفهـم
|
|
سـيان
ذلـك
إن
اثـروا
وإن
عـدموا
|
|
قـد
طـرزوا
حلـل
العليـا
بفخرهـم
|
وانقــاد
كــل
أخــي
علـم
لعزهـم
|
|
قــوم
إذا
طرقـت
أبوابنـا
التقـم
|
يســتدفع
السـوء
والبلـوى
بحبهـم
|
|
ويســتزاد
بــه
الاحســان
والنعـم
|
|
لـم
تحـو
شـمس
الضحى
وما
صباحتهم
|
كلا
ولا
حـــاز
ذو
حلــم
رجــاجتهم
|
|
ولا
حــوى
الغيــث
هطـالا
سـماحتهم
|
يـأبى
لهـم
ان
يحـل
الـذم
ساحتهم
|
|
خيــم
كريــم
وأبـد
بالنـدى
هضـم
|
|
علــومهم
حيرتنــا
فــي
عجائبهـا
|
اكفهــم
غمرتنــا
فــي
ســحائبها
|
|
أنــوارهم
بهرتنــا
فـي
ثواقبهـا
|
بيــوتهم
مـن
قريـش
يستضـاء
بهـا
|
|
في
النائبات
وعند
الحكم
إذ
حكموا
|
|
أيــام
أتبــاعهم
خفــض
بلا
نكــد
|
وكـــف
أعـــدائهم
كــف
بلا
عضــد
|
|
وشـمس
عليـاهم
لـم
تخـف
عـن
أحـد
|
بـدر
لهـم
شـاهد
والشـعب
مـن
أحد
|
|
والخـدقان
ويـوم
الفتـح
إذ
صدموا
|
|
يـوم
البصـيرة
كـم
أرضى
منا
صلهم
|
ويــوم
صــفين
كـم
أروى
ذوابلهـم
|
|
ووقعـة
الهـر
كـم
أصـفت
منـاهلهم
|
وخيـــبر
وحنيــن
يشــهدان
لهــم
|
|
وفــي
قريضــة
يــوم
صــيلم
قتـم
|
|
يجــري
بـأمر
إلـه
الخلـق
أمرهـم
|
مســلم
عنــد
كــل
النـاس
فخرهـم
|
|
علا
علــى
ســائر
الأقــدار
قـدرهم
|
مقــدم
بعــد
ذكــر
اللـه
ذكرهـم
|
|
فـي
كـل
بـدء
ومختـوم
بـه
الكلـم
|
|
يـا
رب
فـاغفر
لمنشيها
الذي
سبقا
|
وللــذي
جــاء
بــالتخميس
متسـقا
|
|
ومـن
قراهـا
وغـالي
طيبهـا
نشـقا
|
والسـامعين
وسـلم
مـا
السحاب
سقى
|
|
علـى
النـبي
كـذا
الآل
الألى
كرموا
|