|
باســم
الــذي
علمنـا
بـالقلم
|
مـن
علـم
الإنسـان
مـا
لم
يعلم
|
|
قــال
الفقيـر
للغنـي
القـادر
|
نجـل
الحسـين
بـن
علي
الحايري
|
|
مــدرس
الطــف
العظيـم
الجـاه
|
الموســوي
العبــد
نصـر
اللـه
|
|
أحمــد
ربــي
حمـد
شـاعر
بمـا
|
بــه
علينــا
كـل
حيـن
أنعمـا
|
|
أبــدى
لنــا
كـواكب
المعـاني
|
زاهـــرة
مــن
فلــك
البيــان
|
|
وألهــم
البــديع
مـن
مـدائحه
|
علـى
الـذي
لـم
يحص
من
منائحه
|
|
ونظــم
الرايـق
مـن
در
الحكـم
|
في
سلك
شعر
العرب
أرباب
الهمم
|
|
وصــل
يــا
رب
علـى
مـن
سـجعا
|
بمــدحه
طيــر
العلــى
مرجعـا
|
|
طـه
الـذي
البـاري
له
قد
شكرا
|
فمــا
يقــول
فـي
علاه
الشـعرا
|
|
وآلــه
أســباب
فــوز
المـذنب
|
أوتــاد
ديـن
اللـه
أهـل
الأدب
|
|
وصـحبه
مـن
نظمـوا
شـمل
الندى
|
مـذ
نـثروا
إحسانهم
طول
المدى
|
|
وبعــد
فالشــعر
كــروض
ناضـر
|
تقطــف
منــه
النمـل
البصـائر
|
|
أطيـــاره
محاســـن
الأوصـــاف
|
وقطـره
الفكـر
اللطيـف
الصافي
|
|
يســـهل
فيــه
كلمــا
تعســرا
|
ويرفـع
القـدر
الـذي
قـد
حقرا
|
|
وخيــره
مــا
بــادر
الأفكـارا
|
معنـاه
قبـل
اللفـظ
لا
ما
غارا
|
|
منــه
بليــن
كــل
قلـب
قاسـي
|
وتنــزل
العصــم
مـن
الرواسـي
|
|
لا
سـيما
إن
قيـل
فـي
مدح
الألى
|
منشـي
البريـات
لهـم
قـد
بجلا
|
|
أعنـي
بهـم
بيـت
قصـيد
الشرفا
|
وأهـل
بيـت
الوحي
أرباب
الوفا
|
|
وكيــف
لا
تمـدحهم
طـول
المـدى
|
وعنهــم
حثــا
لنــا
قـد
وردا
|
|
مـن
قـال
فينا
بيت
شعر
قد
بنى
|
لـه
الإلـه
فـي
الجنـان
مسـكنا
|
|
فكـــم
نظمــت
فيهــم
قصــيده
|
خريــدة
فــي
حســنها
فريــده
|
|
تهـــزأ
بالشــقيق
والمنثــور
|
وبالصــبا
واللؤلــؤ
المنثـور
|
|
ليــس
لهــا
فـي
حسـنها
نظيـر
|
كأنهــا
عصــر
الصـبا
النضـير
|
|
لا
ســيما
ذي
النفحـة
القدسـيه
|
فـي
مـدح
خيـر
الخلـق
والبريه
|
|
عليـه
صـلى
اللـه
طـول
الـدهر
|
وآلــه
الأطهــار
أهــل
الـذكر
|