|
إعرابهــم
أيضـاً
يسـمّى
عملا
|
كمـا
ذكرنـا
فـي
الكلام
اوّلا
|
|
وهُـو
لتغييـر
اواخـر
الكلـم
|
مـن
اختلاف
العامـل
الذي
علم
|
|
اقســـامه
حركـــة
أو
حــرفُ
|
وثـالث
الاقسـام
جـاء
الحـذف
|
|
والحركـــات
ضـــمّة
وفتحــه
|
وكســـرةٌ
اطلاقهــا
ذو
صــحّه
|
|
علـى
البنـاء
وعلـى
الاعـرابِ
|
فــي
مـذهب
الجانـح
للصـواب
|
|
والرفـع
والنصب
مع
الجر
على
|
حركــة
الاعــراب
دلّــت
بجلا
|
|
والعـــدّ
للحــروف
مســتبينُ
|
واو
ويـــاءٌ
الـــفٌ
ونـــون
|
|
والحـذف
فـي
ثلاثـة
قـد
حصرا
|
مختصـة
بالفعـل
عنـد
من
درى
|
|
حركـــة
تخـــذف
بالســـكون
|
وحــذف
آخــر
وحــذف
النـون
|
|
حملتهــا
عشــرة
ختـم
المئة
|
وإن
يكـن
خـالف
فـي
ذاك
فئه
|
|
كالشــيخ
عشــرة
ختـم
المئة
|
وغيـره
مـن
اهـل
هـذا
الشان
|
|
ثـم
الـذي
يعـرب
باعتبار
ما
|
يعطـى
لـه
مـن
كـل
ما
تقدما
|
|
تسـعة
انـواع
علـى
ما
حرروا
|
لأنهـم
فـي
حصـرها
قـد
قرروا
|
|
بــــانه
إمــــا
بحركـــات
|
يعــرب
او
بــالحرف
خالصـات
|
|
وذا
هــو
الاسـم
وامـا
مَعَهـا
|
حذفٌ
وهذا
الفعل
فاضبط
جمعها
|
|
والإســم
إن
يعــرب
بحركــات
|
فــذاك
قســمان
كمـا
سـيأتي
|
|
مـا
تـمّ
إعراباً
بأن
كان
رفع
|
بضـمة
نحـو
السـّعيد
المتبـع
|
|
وكــان
نصــبه
بفتحــة
وجـر
|
بكسـرة
كالجـد
في
الخير
يسر
|
|
وذلـك
اسـمٌ
مفـرد
إذا
انصرف
|
وجمــع
تكســير
بـذلك
اتصـف
|
|
والثـاني
يـدعى
ناقص
الاعراب
|
وهـــو
شــيئان
بلا
ارتيــاب
|
|
مـا
منـع
الصـرف
فرفعه
يضم
|
والنصـب
والجـر
بفتـح
ملتزم
|
|
والجمـع
للمـؤنث
الـذي
سـلم
|
فكسره
في
النصب
والجر
التزم
|
|
والإســم
إن
تعربـه
بـالحروف
|
أيضـاً
على
قسمين
في
المعروف
|
|
فتــام
الاعــراب
وذاك
يرفـعُ
|
بــالواو
والجـر
بيـا
يسـمّع
|
|
ونصــبه
بــألفٍ
وذلــك
الـسّ
|
تــة
أسـماء
بشـرط
مـاالتبس
|
|
معتلّــة
مفــردة
فـي
الكلـم
|
مضــافة
لغيــر
يـا
التكلّـم
|
|
وإن
تكــون
مــع
ذا
مبكــره
|
وهــي
أبـوه
وحموهـا
للمـره
|
|
كــذاك
فــوه
وكــذا
هنــوه
|
وجــاء
ذو
مــال
كـذا
أخـوه
|
|
فنـاقص
الاعـراب
بـالواو
رفع
|
ونصــبه
وجــره
باليـا
سـمع
|
|
وذاك
جمـــعٌ
ســـالم
مــذكّر
|
ومـا
بـه
أُلحـق
فيمـا
ذكروه
|
|
كنحـو
جـاء
المرسـلون
ولنـا
|
اولـو
سـيادة
بهم
زال
العنا
|
|
كــذا
المثنّـى
رفعـه
بـالالف
|
ونصــبه
وجـره
باليـا
اعـرفِ
|
|
نقـول
جـاء
العـاملان
والتحق
|
كلا
وكلتــا
إن
لمضــمرٍ
سـبق
|
|
وثـالث
الاقسـام
مـا
بالحركه
|
والحــذف
إعرابـاته
مشـتركه
|
|
وذاك
دومــاً
كامــل
الاعـرابِ
|
وهـو
علـى
قسـمين
في
الصواب
|
|
والثـاني
مختوم
بواو
او
الف
|
او
يــا
فكلــه
بمعتـلّ
عـرف
|
|
ذو
الـواو
واليـا
رفعه
يقدّر
|
لثقــلٍ
والنصــب
فيـه
يظهـر
|
|
والــفٌ
رفعــاً
ونصــباً
قـدّرِ
|
فـي
نحـو
يخشـى
الله
للتعذر
|
|
واجـزم
لهـا
بحذف
حرف
العِلةِ
|
مــع
بقــاء
حركـات
اللفظـةِ
|
|
تقـول
لم
يخش
ولم
يدع
الفتى
|
كـذاك
لـم
يـرم
كما
قد
ثبتا
|
|
امـا
الـذي
بـالحرف
والحروفِ
|
يعـرب
فـي
مـذهبنا
المعـروف
|
|
فهــو
يكــون
نـاقص
الاعـراب
|
كمـا
روى
عـن
منطـق
الأعـراب
|
|
وهــو
مضــارعٌ
يجيــء
تلـوه
|
ضـمير
رفـعٍ
غيـر
نون
النسوه
|
|
كــألف
اثنيــن
وواو
الجمـع
|
ويـاء
أنـثى
خـوطبت
كاسترعي
|
|
فرفعـه
بـالنون
امـا
الجـزمُ
|
فحــذفه
فيــه
كنصــبٍ
حتــم
|
|
كــالعلم
والصــلاح
ينجيــان
|
والنــاس
يســحبون
للنيـران
|
|
وأثـر
الاعـراب
إن
لفظـاً
ظهر
|
فـذاك
بـاللفظيّ
عرفـاً
اشتهر
|
|
كيغفــر
اللــه
لأهـل
الـذنب
|
ويشــفع
النـبيّ
عنـد
الكـرب
|
|
أومـا
بلفـظ
معـرب
لن
يظهرا
|
وكــان
فـي
آخـره
قـد
قـدّرا
|
|
لعلـــةٍ
فســـَمِّ
بالتقــديري
|
نحـو
هـدى
العاصـي
به
سروري
|
|
ومـا
سـواهما
بـان
مـا
ظهرا
|
لفظـاً
ولا
فـي
آخـرٍ
قـد
قدرا
|
|
بـل
كـان
مـانعٌ
بنفس
الكلمه
|
فهــو
محلّــيٌّ
ولـن
تسـتبهمه
|
|
وذاك
مــا
بنـي
مـن
الأسـماء
|
نحـــو
أنــا
ومــن
وهــؤلاء
|
|
او
كــان
معربــاً
بلا
حكـايه
|
نحــو
ولعـت
بـذوي
الهـدايه
|
|
ِإلـى
هنـا
انتهـى
بيَ
المقالُ
|
وإن
يكـــن
لبســـطه
محــال
|
|
لكنّنــي
لــم
أرد
التطـويلا
|
ولا
زيـــادة
علــى
مــاقيلا
|
|
هـذا
وقـد
نقصـت
بعض
الأمثله
|
كــي
لا
يراهـا
طـالبٌ
مطـوّله
|
|
وأحمــد
اللـه
الـذي
أعانـا
|
حـتى
اكتسـى
نظامها
البيانا
|
|
مصــليّاً
مسـلماً
طـول
المـدى
|
علـى
النـبيِّ
الهاشـمي
أحمدا
|
|
وآلـــه
وصــحبه
وكــلّ
مَــن
|
سـار
مـن
الهدي
على
خير
سنن
|
|
مـا
سـجعت
فـي
ايكها
الحمامُ
|
ولاح
بـــدرٌ
زانــه
التمــام
|