|
تــدارك
أجــل
المرسـلين
بإحسـان
|
فـأنت
علـي
الجـاه
والقدر
والشان
|
|
وجـد
وتفضـل
بالرضى
واكفني
القضا
|
وانعـم
ببرهـان
يقـد
يـد
الشـاني
|
|
إليـك
النجائي
يا
إمام
الورى
ويا
|
سـراج
الهـدى
يا
سيد
الإنس
والجان
|
|
بقربــك
مـن
مـولاك
بالمـدد
الـذي
|
تـولاك
فيـه
اللَـه
يـا
شـبل
عدنان
|
|
أغـث
بقبـول
واصـرف
الهـم
والبلا
|
وكيـد
العـدا
والقـائمين
ببهتـان
|
|
وقـل
أنـت
منـي
لا
تخـف
كيـد
ظالم
|
وكــم
بأســرار
العنايـة
نقصـاني
|
|
توسـل
إلـى
المـولى
فجاهك
لم
يخب
|
وقـم
بمـرادي
واكفنـي
شـر
خـواني
|
|
ورد
بســهم
القهــر
قاصــد
ذلـتي
|
فعزمــك
مشــهود
وســيفك
ربــاني
|
|
وجرحتــك
الـدهماء
ليـس
لهـا
دوا
|
ورمحـك
مطعـون
بـه
الحاسد
الجاني
|
|
ســألتك
بالصــديق
صــاحبك
الـذي
|
منـــاقبه
صـــحت
بآيــات
قــرآن
|
|
وبالسـيد
الفـاروق
مـن
بدد
العدا
|
وشــيد
الــدار
أعنـى
ابـن
عفـان
|
|
بصـهرك
ابـن
العـم
حيـدرة
الرضـى
|
علـى
أبـي
السـبطين
عـزى
وعلواني
|
|
وواســطتي
العظمـى
إليـك
وكـافلي
|
إذا
الـدهر
بـالريب
الخفـي
تولاني
|
|
وقـــدوة
أولاد
الرســـول
وجــدهم
|
وعيـن
رجـال
اللَـه
فـي
كـل
ميدان
|
|
أخيـك
عريـض
الجـاه
عندك
بارع
ال
|
كرامــة
شــهم
الآل
منقــذ
لهفـان
|
|
بشـبليه
سـبطيك
الكريميـن
ثم
بال
|
جليلـــة
أم
الآل
أشـــرف
نســوان
|
|
حقيقـة
معنـى
عقـدة
النسـب
الـذي
|
بهــا
لــك
موصـول
بأكمـل
عنـوان
|
|
بسـاداتنا
الأصـحاب
بالشـهم
خالـد
|
أميـر
بنـي
مخزم
ذي
المدد
الداني
|
|
هزبـر
الوغـا
ابن
الوليد
الذي
له
|
إيـاد
بهـا
كـم
فـل
عصـبة
طغيـان
|
|
بســر
أبــي
أيــوب
خالــد
الـذي
|
علا
فـي
علا
الأنصـار
شـانا
على
شان
|
|
بأسـيادنا
الغر
الميامين
قادة
ال
|
بريـة
أهـل
الـبيت
أقمـار
أكـوان
|
|
بدولــة
زيــن
العابــدين
وصـدقه
|
وبالبـاقر
المعـروف
فـي
كل
عرفان
|
|
بجعفـر
أعنـى
الصـادق
الوعد
سيدي
|
وبالكــاظم
الحـاوي
جلالـة
إيمـان
|
|
وبالعسـكري
ثـم
الرضـى
ثم
بالنقي
|
كـذاك
التقـى
ثـم
الجـواد
لعيـان
|
|
وبالســيد
المهــدي
وكـل
فروعهـم
|
وأولادهــم
فــي
كــل
أرضٍ
وبلـدان
|
|
ويـا
سـيد
الشيخ
الرفاعي
أحمد
ال
|
أكـابر
تـاج
القـوم
صـاحب
برهـان
|
|
إمـام
صـدور
الأوليـا
حضـرة
الرضى
|
مربـي
الهـدى
غـوثي
بنكبة
أزماني
|
|
وســيلتي
الكـبرى
لبابـك
أن
أقـل
|
أغثنـي
حبيب
اللَه
يا
راحم
العاني
|
|
بـه
وببـاز
اللَه
ذي
الباس
والعلا
|
ســراج
ربــا
بغــداد
كـوكب
جيلان
|
|
وبالبـدوي
السـيد
الغـوث
صاحب
ال
|
منـاقب
والمـولى
الدسـوقي
سلطاني
|
|
بوالـدنا
الصياد
والغوث
ذخرنا
ال
|
إمـام
سـراج
الـدين
كافـل
إخواني
|
|
بكــل
ولــي
طيــب
العهــد
كامـل
|
وكــل
محــب
غــاب
فيــك
بإذعـان
|
|
بــدائرة
الغيــب
الخفـي
وأهلهـا
|
وبــالأرقعين
الغـر
أصـحاب
ديـوان
|
|
بزمــرة
ركــب
المـؤمنين
جميعهـم
|
بمـا
جـاء
مـن
أمـر
قـديم
وتبيان
|
|
بعلمـك
ولاسـر
المطلسـم
فـي
العمى
|
وقـدرتك
العليـا
علـى
أهـل
عدوان
|
|
تحــرك
بســيف
أحمــدي
وخــد
بـه
|
رقـاب
العدا
وافتك
بهم
فتك
غضبان
|
|
ودمـر
همـو
بـالبطش
والقهر
عاجلاً
|
واطلـق
بنـادي
حيهـم
نـار
أحـزان
|
|
واطلق
بهم
خيل
القضا
واكفف
الرضى
|
ببأسـك
عنهـم
واكسـهم
ثـوب
أكفان
|
|
فغارتــك
العظمـى
لهـا
كـل
غيـرةٍ
|
يهــد
بهــا
كسـرى
ودعمـة
إيـوان
|
|
وســيفك
ســيف
لا
تــداوي
جروحــه
|
وبابـك
مأوى
الأمن
للقاضي
والداني
|
|
أتيتـك
ملهـوف
الفـؤادٍ
وليـس
لـي
|
ســواك
لإعــزازي
ونصــرة
أعـواني
|
|
أمـولاي
يا
جد
الحسين
الوحا
الوحا
|
فلســطانك
العـالي
علا
كـل
سـلطان
|
|
وجـــودك
مبــذول
وغوثــك
حاضــر
|
وأنـت
حمـى
جـاهي
إذا
خـان
خلانـي
|
|
إليـك
البحـات
الدهر
مادمت
باقياً
|
وفــي
كـل
آن
فيـك
ظنـي
وإيمـاني
|
|
فجـد
يـا
ختـام
المرسـلين
بنظـرةٍ
|
يعــز
بهـا
قـدري
وتشـمخ
أركـاني
|
|
ودمـر
بهـا
البـاغي
ورد
من
اعتدى
|
علـــي
وعـــامله
بقهــر
وخــذلان
|
|
ومـد
اليـد
البيضـا
لنصـري
إننـي
|
لنجـدتك
العليا
التوت
عين
إنساند
|
|
بأعتابــك
الفســحا
أنخـت
مطيـتي
|
وخليــت
أصـحاب
الزمـان
وإخـواني
|
|
وهـا
أنـت
بـاب
اللَه
من
غير
ريبةٍ
|
وفضـلك
فضـل
اللَـه
والسـر
رحماني
|
|
بشــانك
عــاملني
بعفــوك
عمنــي
|
بنصــرك
أتحفنــي
بلطفــك
تـولاني
|
|
عليــك
صــلاة
اللَــه
والآل
كلهــم
|
وصــحب
وكــل
التــابعين
بإحسـان
|